बोकारो इस्पात संयंत्र की प्रगति ही बोकारो के विकास का आधार
बोकारो :सेल की प्रमुख इकाई बोकारो स्टील प्लांट केवल एक औद्योगिक प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि पूरे बोकारो स्टील सिटी और आसपास के क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है। यह संयंत्र 20 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष तथा बड़ी संख्या में अन्य लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराता है। छोटे व्यवसायों की आजीविका, शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी सामाजिक व्यवस्थाएं और क्षेत्रीय विकास – सभी इस संयंत्र की स्थिरता और सतत उत्पादन पर निर्भर हैं।पूर्व में हुए अवरोध और हिंसक विरोध से उत्पादन, वित्तीय प्रदर्शन और विस्तार योजनाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई थीं, जिससे विकास की रफ्तार थम गई थी। ऐसी घटनाएं बोकारो को आगे बढ़ाने के बजाय वर्षों पीछे धकेल देती हैं। बड़ी कठिनाइयों और अथक प्रयासों के बाद ही निवेश और औद्योगिक विश्वास को पुनः स्थापित किया जा सका है।
संयंत्र के विस्तारीकरण हेतु लगभग 20,000 करोड़ रुपये का निवेश रोजगार, आधारभूत संरचना और औद्योगिक प्रगति के नए द्वार खोलने जा रहा है। बोकारो स्टील प्लांट के विस्तारीकरण से सम्बंधित कई टेंडर निकल चुके और कई निकलने वाले हैं। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि विस्थापित युवाओं के लिए भी रोजगार और आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर सृजित होंगे। यह निवेश पूरे क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व विकास का आधार बन सकता है।इस वित्त वर्ष पहले के 9 महीनों में प्लांट का वित्तीय प्रदर्शन भी उतना आशाजनक नहीं रहा है हालांकि हाल के महीनों में इसने वापस रफ़्तार पकड़ी है। इसलिए ऐसे समय में, जब बोकारो में परिस्थितियाँ पुनः सामान्य हो रही हैं और विकास की रफ्तार फिर से पटरी पर लौट रही है, यहाँ के आद्योगिक-सामाजिक वातावरण में किसी भी समूह द्वारा अस्थिरता पैदा करना दुर्भाग्यपूर्ण होगा क्योंकि किसी भी प्रकार का आंदोलन यदि संयंत्र के संचालन को बाधित करता है, तो उसका प्रभाव केवल प्रबंधन या कंपनी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एक बड़े जन समुदाय को प्रभावित करता है ।यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस संयंत्र की भूमिका केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां निर्मित इस्पात देश की प्रमुख आधारभूत परियोजनाओं से लेकर भारतीय नौसेना के युद्धपोतों तक में उपयोग होता है, जो राष्ट्र की आर्थिक और सामरिक शक्ति को सुदृढ़ करता है। पिछले एक वर्ष में ही नौसेना के अनेक नए जहाजों के निर्माण में बोकारो के इस्पात की आपूर्ति की गई है।लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण और रचनात्मक विरोध सभी का अधिकार है। परंतु यह भी उतना ही आवश्यक है कि विरोध का स्वरूप ऐसा हो, जिससे औद्योगिक माहौल, निवेश और रोजगार प्रभावित न हों। संवाद, सहयोग और आपसी समझ ही स्थायी समाधान का मार्ग हैं, टकराव नहीं। संयंत्र प्रबंधन ने भी क्षेत्र की जनता खासकर विस्थापित समूहों और युवाओं के कई मुद्दों पर सकारात्मक पहल करते हुए उनके कल्याण के लिए कई कदम जैसे अप्रेंटिस युवाओं को संवेदकों द्वारा संयंत्र के कार्य में प्राथमिकता में नियोजन उपलब्ध कराना, विस्थापित ठेकेदारों को वरीयता के आधार पर कार्य उपलब्ध कराना इत्यादि उठायें है। प्लांट के विस्तारीकरण से ऐसे कल्याणकारी पहलों में और बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना है। बोकारो की तरक्की, बोकारो स्टील प्लांट की तरक्की से सीधे जुड़ी है। इसलिए सभी हितधारकों और पक्षों से यह अपेक्षा है कि संयंत्र और शहर की शांति, सुरक्षा और निरंतरता बनाए रखने में उनका सहयोग रहे ताकि बोकारो और इस क्षेत्र की प्रगति जारी रहे ।



