पीरपैंती का चुनावी रण : मुरारी की मुरली, मरता क्या नहीं करता’ और ‘संघ’ के भरोसे

प्रदीप विद्रोही,भागलपुर। बिहार की सियासत में भागलपुर स्थित पीरपैंती विधानसभा इन दिनों चर्चा में है। यहां मुकाबला सीधा है – भाजपा बनाम आरजेडी। एक तरफ हैं भाजपा के नए दांव – मुरारी पासवान, तो दूसरी ओर मैदान में हैं आरजेडी के पुराने खिलाड़ी – रामविलास पासवान। इस बार भाजपा ने सिटिंग विधायक का टिकट काटकर नई पारी शुरू की है और मुरारी को ‘कमल’ थमाया है। लेकिन मुरारी की ‘मुरली’ की धुन किसी सियासी बाजे से नहीं, बल्कि ‘संघ’ की ताल पर बज रही है। मुरारी की नाव ‘मरता क्या नहीं करता’ की भीड़ के भरोसे चुनावी गंगा पार करने को प्रयासरत है. फिलहाल, चुनाव प्रचार थम चुका है। अब प्रत्याशी अपने समर्थकों तथा अपनी मेहनत का आंकलन का अनुमान लगा रहे हैं. समर्थक अपने – अपने इलाके में मतदान की प्रक्रिया में तेजी को लेकर जोड़ – घटाव में लग गए हैं।

मुरारी का नया सफर : ‘संघ’ के कंधे, जनता की उम्मीदें

मुरारी पासवान के समर्थक मानते हैं कि यह चुनाव सिर्फ चेहरे का नहीं, बल्कि संगठन के बूते का है। संघ के स्वयंसेवक गली-गली, गांव-गांव घूमकर मुरारी के लिए माहौल बना रहे हैं। ‘मरता क्या नहीं करता’ की तर्ज पर भाजपा के पुराने कार्यकर्ता, जो पहले अपने चहेते को टिकट नहीं मिलने पर खामोश थे, अब नए चेहरे के साथ कदमताल कर रहे हैं। लोग कहते हैं – ‘जब संघ मैदान में हो, तो मुरली की धुन खुद-ब-खुद गूंजने लगती है।’ संघी की बड़ी भागीदरी के कारण एनडीए के घटक जेडीयू में थोड़ी मुंह फुल्ली सा दृश्य भी दिखता है। जो असरदार नहीं माना जा रहा है। फ़िलहाल, नेता कार्यकर्ता कहते हैं अंततः ‘विवेक’ से काम लेने का है।

आरजेडी का ‘पुराना भरोसा’, बागियों की ‘नई ताकत’

दूसरी ओर आरजेडी ने अपने आजमाए हुए चेहरे, रामविलास पासवान पर फिर से भरोसा जताया है। इस बार उन्हें भाजपा के बागी विधायक ललन कुमार और उनके समर्थकों का भी साथ मिल गया है। राजनीतिक गलियारों में यह जोड़ी चर्चा में है – ‘रामविलास के साथ ललन, और मैदान में उठे सियासी तरंग!’ अंदरखाने में कहा जा रहा है कि बागियों के आने से रामविलास को बूथ स्तर पर अतिरिक्त ताकत मिल गई है।

स्टार प्रचारकों की परेड

पीरपैंती का यह चुनावी अखाड़ा अब सिर्फ स्थानीय नहीं रहा। भाजपा के लिए खुद गृह मंत्री अमित शाह, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, सांसद निशिकांत दुबे और भोजपुरी स्टार निरहुआ तक वोट मांग चुके हैं। आरजेडी की तरफ से तेजस्वी यादव ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। चुनावी मैदान अब ‘लोकल बनाम नेशनल’ के अंदाज में बदल चुका है।

गंगा कटाव – चुनाव की पुरानी पीड़ा, नए वादों की नमी

गंगा के कटाव से पीरपैंती का दर्द नया नहीं है। लेकिन इस चुनाव में भी यह सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। तटवर्ती गांवों की बर्बादी और विस्थापन की टीस हर सभा में झलक रही है। आरजेडी सुप्रीमो ने इस पर जनता की नब्ज पकड़ते हुए ऐलान किया है – ‘सरकार बनी, तो गंगा कटाव का स्थायी समाधान होगा।’ लोगों की उम्मीदें अब वादों के समंदर में तैर रही हैं, मगर किनारा किसे मिलेगा, ये वक्त बताएगा।

कुलमिलाकर, पीरपैंती की हवा में इस वक्त बस यही कहा जा सकता है – ‘यहां चुनाव नहीं, जंग है इज्जत की। एक तरफ संघ की रणनीति, तो दूसरी ओर बागियों की बंदूक। देखना यह है कि मुरारी की मुरली बजेगी या रामविलास की रणभेरी।’

जिले में सबसे अधिक मतदाता पीरपैंती में

जिले भर में सबसे अधिक मतदाता पीरपैंती में ही है।
पीरपैंती में मतदाताओं की संख्या कुछ इस प्रकार है- कुल: 3,44,278
पुरुष: 1,77,893
महिला: 1,66,379
थर्ड जेंडर: 06
दिव्यांग: 3,976
85+ : 1,045
सेवा मतदाता: 1,294

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