रचनात्मक प्रतिभा के धनी पंकज मिश्रा को मिला विशेष सम्मान

अनूप कुमार सिंह,पटना। साहित्य, रंगमंच, टेलीविजन व फिल्म जगत में अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का लोहा मनवा चुके वरिष्ठ लेखक, निर्देशक व अभिनेता पंकज मिश्रा को गरिमामय समारोह में सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन की ओर से बिहार इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, पटना में आयोजित दिव्य रश्मि पत्रिका के 13वें वार्षिकोत्सव व वीर विनायक दामोदर सावरकर जयंती समारोह के दौरान प्रदान किया गया। उक्त समारोह में

कला, साहित्य  व सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिष्ठित लोग उपस्थित थे। समारोह के दौरान पंकज मिश्रा के रचनात्मक योगदान, सामाजिक सरोकारों से जुड़ी उनकी सोच तथा रंगमंच व फिल्म जगत में उनकी सक्रिय भूमिका की विशेष चर्चा की गई।

सम्मान प्राप्त करने के बाद पंकज मिश्रा ने गणादेश को बताया कि यह सम्मान उनके लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि कला व साहित्य के प्रति उनकी वर्षों की साधना का सम्मान है। उन्होंने आयोजन समिति व दिव्य रश्मि के संपादक डॉ. राकेश दत्त मिश्रा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन कलाकारों को समाज के लिए बेहतर कार्य करने की प्रेरणा

पंकज मिश्रा लंबे समय से रंगमंच व दूरदर्शन की दुनिया में सक्रिय हैं। उन्होंने लेखक, निर्देशक व अभिनेता के रूप में कई चर्चित प्रस्तुतियों को नई पहचान दी है। उनके लिखे व निर्देशित नाटकों में आज का लीडर, मैं गद्दार नहीं, मेहनत जिंदाबाद  विशेष रूप से चर्चित रहे हैं।

इसके अलावा उन्होंने शॉर्ट फिल्मों और टेली फिल्मों के माध्यम से भी समाज से जुड़े मुद्दों को उठाए!वहीं

टीवी धारावाहिकों में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। संघर्ष, माई, टूटे ना सपनवा हमार, घर अंगना, कब तक सहेंगे हम और कहानी किस्मत की जैसे धारावाहिकों में उन्होंने कथा, पटकथा और संवाद लेखन के माध्यम से दर्शकों के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाई।

पंकज मिश्रा वर्ष 1996 से दूरदर्शन से जुड़े हुए हैं। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर कार्य किया है। वे फिल्म राइटर्स एसोसिएशन, मुंबई के आजीवन सदस्य भी हैं।

उनकी रचनात्मक यात्रा को देखते हुए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा जा चुका है। इनमें बिहार कलाश्री पुरस्कार, बेस्ट डायरेक्टर अवार्ड, प्रतिभा

बहुत जल्द उनकी नई हिंदी शॉर्ट फिल्म “यहाँ कौन है मेरा” दर्शकों के बीच आने वाली है। इंपीरियल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी यह फिल्म सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों की संवेदनशील कहानी पर आधारित है। फिल्म में एक पिता और पुत्र के बदलते रिश्तों को बेहद भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म का शीर्षक गीत भी विशेष आकर्षण का केंद्र है, जिसके गीतकार स्वयं पंकज मिश्रा हैं।

पंकज मिश्रा का मानना है कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सोचने और बदलने की प्रेरणा देने का सशक्त जरिया है। यही कारण है कि उनके अधिकांश कार्यों में सामाजिक चेतना व मानवीय मूल्यों की झलक दिखाई देती है।

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