राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदों पर फिर सकता है पानी !

रांची : झारखंड में 18 जून को राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होना है। मौजूदा संख्या बल को देखें तो दोनों सीटों पर सत्तारूढ़ गठबंधन की जीत लगभग तय मानी जा रही है। एक सीट जीतने के लिए 28 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है, जबकि गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में अब इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि इन दो सीटों पर उम्मीदवार किस दल से होंगे।

झारखंड की गठबंधन सरकार का नेतृत्व हेमंत सोरेन कर रहे हैं। पिछले कुछ समय से झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर कई मौकों पर मतभेद सामने आते रहे हैं। बिहार और असम विधानसभा चुनाव के दौरान भी दोनों दलों के रिश्तों में खटास देखने को मिली थी। असम और पश्चिम बंगाल में झामुमो ने अलग राह अपनाते हुए अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया था, हालांकि उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच कांग्रेस इस बार राज्यसभा चुनाव में एक सीट पर अपना दावा मजबूत तरीके से पेश कर रही है। पार्टी आलाकमान ने भी इस चुनाव को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश प्रभारी के राजू और तवलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रममार्क को रांची भेजा। दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर कांग्रेस को एक सीट देने का आग्रह किया। हालांकि मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी और बातचीत आगे जारी रखने की बात कही। इससे कांग्रेस नेताओं की उम्मीदों को फिलहाल झटका लगता दिख रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछली बार की तरह इस बार भी झामुमो राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को तरजीह देने के मूड में नहीं है। माना जा रहा है कि पार्टी दोनों सीटों पर अपने करीबी या परिवार से जुड़े चेहरों को मौका दे सकती है। संभावित नामों में अंजली सोरेन और हेमलता सोरेन की चर्चा तेज है। वहीं राजनीतिक समीकरण बने तो सीता सोरेन का नाम भी सामने आ सकता है।

ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदें एक बार फिर अधूरी रह सकती हैं।

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