विधायक गोपाल मंडल का गंभीर आरोप- सांसद अजय मंडल एचआईवी पॉजिटिव, उन्हें संसद जाने से रोका जाना चाहिए
प्रदीप विद्रोहीभागलपुर। भागलपुर की राजनीति इन दिनों किसी टीवी डेली सोप से कम नहीं लग रही—ड्रामा, ट्विस्ट और अब एक ऐसा आरोप जो सियासत की ज़मीन को हिला दे। जदयू के दो बड़े नेता—सांसद अजय मंडल और विधायक गोपाल मंडल—अब आर-पार के मूड में हैं।
गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक गोपाल मंडल ने वो कह डाला जो आमतौर पर निजी दायरे में रह जाता है। उन्होंने खुले मंच से दावा किया कि “सांसद अजय मंडल एचआईवी पॉजिटिव हैं, और ऐसे व्यक्ति को संसद में नहीं जाना चाहिए।” मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री इसकी जांच करवाए। विधायक यहीं नहीं रुके। उन्होंने सांसद पर हत्या जैसे गंभीर अपराधों में शामिल रहने का आरोप भी ठोक दिया। कहा कि “उनके पुराने आपराधिक संबंध रहे हैं और उन्होंने खुद कई हत्याओं को अंजाम दिया है।” साथ ही सांसद पूर्व में शराब की फैक्ट्री लगाने, अफीम की खेती करने और रेलवे की पटरी और बिजली के तार चुराने का भी आरोप लगाया।
यह बयान किसी बम से कम नहीं था। चार दिन पहले भी विधायक गोपाल मंडल ने सांसद और प्रदेश महासचिव पर अभद्र टिप्पणी की थी, जिसके खिलाफ अजय मंडल ने घोघा थाना में एफआईआर दर्ज करवाई थी। पर अब मामला “व्यक्तिगत आरोप” से निकलकर चरित्र हनन के सार्वजनिक प्रयास की ओर मुड़ गया है।
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि ये आरोप सिर्फ दो नेताओं की आपसी लड़ाई नहीं, बल्कि जदयू के अंदर गहराती गुटबाज़ी की साफ तस्वीर पेश कर रही है। एक ओर पार्टी का अनुशासन, दूसरी ओर खुल्लमखुल्ला बयानबाज़ी – सवाल उठता है कि नीतीश कुमार की पार्टी इस अंतर्कलह को कब तक झेल पाएगी?
सवाल यह भी है कि क्या अब पार्टी नेतृत्व इस ‘मंडल वॉर’ को शांत कर पाएगा या आने वाले चुनावों में यह विवाद राजनीतिक नुकसान का कारण बनेगा?
( बॉक्स खबर )
ताज़ा घटनाक्रम:
विधायक ने कहा था सांसद रखैल रखते हैं
सांसद ने एफआईआर दर्ज कराई थी
विधायक ने निजी बीमारी का मुद्दा सार्वजनिक कर दिया
हत्या जैसे संगीन आरोप लगाए गए
जदयू में अंदरखाने हलचल तेज
वहीं अंग की राजनीति को बखूबी समझने वाले कहते हैं राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप आम हैं, लेकिन जब नेता खुद अपनी ही पार्टी के सांसद को संसद जाने से रोकने की बात करें, तब सवाल उठना लाज़िमी है—ये सियासत है या साजिश?



