झारखंड नगरपालिका मार्ग (पथ) कर नियमावली 2025 के प्रारूप का वैश्य महापरिवार झारखंड ने तीखा विरोध किया है

गणादेश,रांची : झारखंड सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी झारखंड नगरपालिका मार्ग (पथ) कर नियमावली 2025 के प्रारूप में नगर निकायों को कमर्शियल वाहनों से पथ कर (रोड टैक्स) वसूलने का प्रावधान किया गया है। इस प्रस्ताव का वैश्य महापरिवार झारखंड ने तीखा विरोध किया है। संगठन के अध्यक्ष आनंद कोठारी ने कहा कि यह व्यवस्था दोहरी कराधान की स्थिति उत्पन्न करेगी और व्यवसायिक वाहन मालिकों पर अतिरिक्त बोझ डालेगी।

कोठारी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में पहले से ही वाहन कर, टोल टैक्स, जीएसटी और बस स्टैंड शुल्क के रूप में भारी कर वसूला जा रहा है। ऐसे में अतिरिक्त पथ कर लागू होने से मालभाड़ा और यात्री किराया बढ़ेगा, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। इसके साथ ही आर्थिक गतिविधियों में बाधा आएगी, छोटे व्यापारी और ट्रांसपोर्टर प्रभावित होंगे और स्थानीय स्तर पर व्यापार व रोजगार पर प्रतिकूल असर पडे़गा।

उन्होंने यह भी कहा कि “एक देश, एक कर” की अवधारणा और जीएसटी लागू करने का उद्देश्य टैक्स की जटिलता कम करना और राजस्व वृद्धि सुनिश्चित करना था। इस प्रक्रिया से राज्य और केंद्र सरकार दोनों को पहले ही पर्याप्त लाभ मिला है। ऐसे में नया कर लगाना न केवल अनुचित है, बल्कि व्यवहारिक कठिनाइयां भी खड़ी करेगा।

कोठारी ने आशंका जताई कि शहरों के प्रवेश द्वार पर कर वसूली से जाम और अव्यवस्था की स्थिति पैदा होगी, जिससे परिवहन और यातायात व्यवस्था प्रभावित होगी।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इन बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करते हुए प्रस्तावित नियमावली की पुनः समीक्षा की जाए और कमर्शियल वाहनों पर नगरपालिका मार्ग (पथ) कर लगाने के प्रावधान को शीघ्र व स्पष्ट रूप से रद्द किया जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *