राष्ट्रीय खेल दिवस पर बाल मंच की फुटबॉल प्रतियोगिता में सात गाँवों की टीमों ने दिखाया दम, मालियादा टीम बनी विजेता

खूंटी : राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर शुक्रवार को मुरहू प्रखंड के बाघमा खेल मैदान में बाल कल्याण संघ के बाल मंच की ओर से फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में गोड़ाटोली पंचायत के सात गाँवों की सात टीमों ने हिस्सा लिया। सुबह से शुरू हुआ रोमांचक मुकाबला पूरे दिन चलता रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि प्रखंड प्रमुख एलिश ओड़ेया और उप प्रमुख अरुण कुमार साबू ने टॉस कर प्रतियोगिता की औपचारिक शुरुआत की। पहला मैच मालियादा और सुरुंडा टीम के बीच खेला गया। मालियादा बाल मंच ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब पर कब्जा जमाया। दूसरा स्थान बाघमा बाल मंच को मिला, जबकि तीसरा स्थान मारूंगटोली बाल मंच की किशोरी टीम के नाम रहा।
उप प्रमुख एलिश ओड़ेया ने कहा कि “राष्ट्रीय खेल दिवस प्रेरणा का दिन है। खेल बच्चों में आत्मविश्वास और टीम भावना पैदा करते हैं। बाल कल्याण संघ का प्रयास सराहनीय है।
वहीं उप प्रमुख अरुण कुमार साबू ने कहा कि खूंटी खेलों की धरती है। आज यहाँ के बच्चों ने खेल मैदान में जोश और जज़्बा दिखाया, वह काबिले तारीफ़ है। संस्था कठिन परिस्थितियों में जी रहे बच्चों को खेल और शिक्षा से जोड़कर नई ऊर्जा दे रही है।”
उन्होंने यह भी कहा कि “प्रखंड में करीब 4500 बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र अब तक नहीं बन पाया है। गरीब परिवार शपथ पत्र की लागत नहीं उठा पाते। इस विषय पर एसडीओ से बात हुई है और जल्द ही शपथ पत्र की बाध्यता खत्म होगी, जिससे बच्चों को उनकी बुनियादी पहचान आसानी से मिल सकेगी।”
दयामनी मुंडू (जिला परिषद सदस्य): “गाँव में बच्चों के लिए फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित होना ऐतिहासिक कदम है। खेल अनुशासन और संघर्षशीलता सिखाते हैं।”

परती पुती (गोड़ाटोली मुखिया): “यह आयोजन बच्चों की प्रतिभा को सामने ला रहा है। पंचायत बच्चों को खेलों के लिए हरसंभव सहयोग देगी।”

संदीप बोदरा (उप मुखिया): “बहुत जल्द किशोरियों के लिए हॉकी प्रतियोगिता भी कराई जाएगी।”

बाल मंच की विशेष भूमिका
बाल कल्याण संघ ने मुरहू प्रखंड के गोड़ाटोली और बीचना पंचायत के 14 गाँवों में बाल मंच का गठन किया है। बच्चे हर सप्ताह बैठकों में अपनी और गाँव की समस्याओं पर चर्चा करते हैं और ग्राम बाल संरक्षण समिति की मदद से समाधान खोजते हैं। बाल विवाह, बाल मजदूरी और बाल तस्करी जैसी समस्याओं पर भी वे सतर्क रहते हैं।

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