बोकारो उपायुक्त अजय नाथ झा में उपायुक्त का थोड़ा भी अहम नहीं ,चबूतरे पर बैठकर पानी पिया, ग्रामीणों संग आत्मीय संवाद किया
बोकारो – बोकारो जिला के उपायुक्त अजय नाथ झा में उपायुक्त का थोड़ा भी अहम नहीं है इनमें मानवीय गुणों का समावेश है ।सभी अधिकारियों को भी इनसे प्रेरणा लेना चाहिए ।आजकल देखा जाता है कि किसी भी विभाग के अधिकारी अगर निरीक्षण में कहीं जाते है तो उनमें अहम भरा रहता है ,क्या वे बोकारो उपायुक्त अजय नाथ झा के जैसा आम जनता की तरह ग्रामीणों संग चबूतरे में बैठेंगे । नहीं ,लेकिन बोकारो उपायुक्त अजय नाथ झा ने चबूतरे पर बैठकर पानी पिया, ग्रामीणों संग आत्मीय संवाद किया ,उनका कुशल क्षेम जाना जी हां , इसी क्रम में चास प्रखंड के चाकुलिया पंचायत के निरीक्षण के क्रम में एक सहज और मानवीय तस्वीर उस समय देखने को मिली, जब उपायुक्त अजय नाथ झा ने औपचारिकता से अलग हटकर गांव के चबूतरे पर बैठकर पानी पिया और ग्रामीणों के साथ आत्मीय संवाद किया।तेज धूप और निरीक्षण की व्यस्तता के बीच जब वे चितामी गांव के भंडारडीह टोला पहुंचे, तो एक चबूतरे पर रुके, तो स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें पानी पीने का आग्रह किया। उपायुक्त ने बिना किसी संकोच के आम ग्रामीण की तरह चबूतरे पर बैठकर पानी ग्रहण किया। इस दौरान वहां मौजूद लोग पहले तो आश्चर्यचकित हुए, फिर सहज होकर उनसे बातचीत करने लगे।ग्रामीणों से बातचीत के दौरान उपायुक्त ने उनकी दैनिक जीवन से जुड़ी समस्याओं, खेती-किसानी की स्थिति, रोजगार के अवसरों तथा सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर खुलकर चर्चा की। उन्होंने ग्रामीणों से सीधे पूछा कि योजनाओं का लाभ सही तरीके से मिल रहा है या नहीं, और कहीं कोई दिक्कत तो नहीं हो रही।इस आत्मीय संवाद ने प्रशासन और आमजन के बीच की दूरी को कम करने का काम किया। ग्रामीणों ने भी बिना झिझक अपनी बातें रखीं और कई स्थानीय समस्याओं की ओर उपायुक्त का ध्यान आकृष्ट कराया।इसी क्रम में स्नातक की छात्रा नेहा एवं इंटर की छात्रा नीतिका ने उपायुक्त अजय नाथ झा को फूलों का गुच्छा भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने दोनों बेटियों को मन लगाकर पढ़ाई करने की सलाह दी तथा उनके अभिभावकों से बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने और उन्हें आगे बढ़ाने का आग्रह किया।उपायुक्त का यह सरल और मानवीय व्यवहार न केवल ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना, बल्कि यह संदेश भी गया कि प्रशासन केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर उतरकर लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझने के लिए प्रतिबद्ध है।



