महंगा हुआ सैर-सपाटा, यादें भी टैक्स के दायरे में भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड से उठते सवाल

भागलपुर। अब तक सैंडिस कंपाउंड को लोग सुकून, हरियाली और खुली हवा का ठिकाना मानते थे। सुबह की सैर हो या शाम की सुकून भरी टहल, बच्चे हों या बुज़ुर्ग यह पार्क सबके लिए था। लेकिन अब यहां घूमना ही नहीं, बल्कि कैमरे से यादें कैद करना भी जेब पर भारी पड़ने वाला है।
भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड में नई व्यवस्था के तहत फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर शुल्क तय कर दिया गया है। अगर कोई व्यक्ति पार्क में फोटो खींचना चाहता है तो उसे ₹150 देने होंगे, वहीं वीडियो बनाने के लिए ₹2000 का शुल्क रखा गया है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि बिना टिकट कैमरा चलाने पर ₹500 का जुर्माना लगाया जाएगा।
यहीं बात खत्म नहीं होती। 25 दिसंबर, 31 दिसंबर और 1 जनवरी जैसे खास दिनों में अब पार्क में प्रवेश भी मुफ्त नहीं रहेगा। इन दिनों हर व्यक्ति को सैंडिस कंपाउंड में कदम रखने के लिए ₹20 का प्रवेश शुल्क चुकाना होगा।
इस फैसले के बाद शहर में बहस तेज हो गई है। लोग पूछ रहे हैं – क्या पब्लिक पार्क अब आम लोगों के लिए नहीं रहे! क्या परिवार के साथ बिताए गए पल और बच्चों की मुस्कान को कैमरे में कैद करना अब लग्ज़री बनता जा रहा है! और सबसे बड़ा सवाल – क्या यादें भी अब टैक्स के दायरे में आ गई हैं! कई नागरिकों का कहना है कि पार्क जैसे सार्वजनिक स्थल आम लोगों के लिए होते हैं, जहां वे बिना अतिरिक्त खर्च के समय बिता सकें। मोबाइल से फोटो लेना आज के दौर में आम बात है, ऐसे में उस पर शुल्क लगाना लोगों को असहज कर रहा है।

हालांकि, दूसरी ओर यह भी तर्क दिया जा रहा है कि पार्क के रखरखाव, साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत होती है, और शुल्क उसी दिशा में एक कदम हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इसका बोझ सीधे आम लोगों की जेब पर डालना सही है!

सैंडिस कंपाउंड का यह नया नियम सिर्फ शुल्क का मामला नहीं है, बल्कि यह सोचने का विषय भी है कि सार्वजनिक स्थानों की परिभाषा क्या अब बदल रही है। जहां कभी लोग बेफिक्र होकर घूमते थे, वहीं अब हर क्लिक और हर कदम की कीमत तय होती दिख रही है। शहर यही जानना चाहता है। सैर पर निकले लोगों से शुल्क वसूलना विकास है या सार्वजनिक अधिकारों पर बढ़ता पहरा!

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