बिहार में एनडीए की ‘ईमानदार’ जीत का खतरा, लोकतंत्र से प्रजा-तंत्र की ओर : रणधीर झा
रांची : राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के नेशनल एक्सक्यूटिव मेम्बर रणधीर झा ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत को यदि पूरी तरह ‘ईमानदार’ माना जाए, तब भी यह स्थिति लोकतंत्र के लिए कम ख़तरनाक नहीं है। यह उस मानसिकता की ओर संकेत है जहाँ जनता नागरिक नहीं, बल्कि ‘प्रजा’ बनती जा रही है। गरीब और प्रवासी मजदूरों को सरकारी लाभों—राशन, सहायता राशि, कथित दो लाख रुपये की योजना—के नाम पर वोट देने के लिए बाध्य किया गया। पंजाब, दिल्ली, नोएडा जैसे राज्यों में काम कर रहे मजदूरों को बताया गया कि वोट नहीं दिया तो लाभ सूची से नाम कट जाएगा। वे सपरिवार बिहार लाए गए और बीजेपी को वोट देना ‘अनिवार्य’ बताया गया। यह खुला ब्लैकमेल और रिश्वत था, जिसे चुनाव आयोग ने नज़रअंदाज़ किया।
नीतीश कुमार बीस वर्षों से सत्ता में हैं, फिर भी बिहार आज भी सबसे गरीब, पिछड़ा और बदहाल शिक्षा-स्वास्थ्य वाला राज्य है। पुलों के टूटने और हजारों करोड़ के घोटालों ने भ्रष्टाचार को उजागर किया, मगर जनता विकास के बजाय ‘व्यवस्था देने वालों’ के प्रति आभार में वोट देती रही। विपक्ष, जन सुराज अभियान और सामाजिक आंदोलनों की मेहनत भी बेअसर रही, जो बताता है कि समस्या कहीं गहरी है।
धार्मिक भावनाओं, कथावाचन और ‘ईश्वर की इच्छा’ वाले नैरेटिव ने जनता को सत्ता की जवाबदेही से दूर कर दिया है। चुनौती यह है कि जनता को नागरिक अधिकारों, लोकतांत्रिक मूल्यों और आधुनिक संविधान के महत्व का बोध कराते हुए फासीवादी प्रवृत्तियों के ख़तरे को समझाया जाए।



