जब रंग, कैमरा और संवाद ने मिलाया हाथ – भागलपुर में “युवा अभिव्यक्ति कार्यशाला” का भव्य समापन

भागलपुर। कभी एक रंग ने कैनवास से कहा – चल, कुछ बोलते हैं, तो कैमरे ने आंखों में झांकते हुए कहा – मैं भी कैद करूंगा तुम्हारी नज़र। कुछ ऐसा ही जीवंत नज़ारा देखने को मिला भागलपुर में, जहां पिछले एक महीने से चल रही युवा अभिव्यक्ति कार्यशाला ने अपने रचनात्मक सफर का रंगीन और जोश भरा समापन कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार तथा जिला प्रशासन, भागलपुर द्वारा आयोजित एक अनोखी कार्यशालाओं की श्रृंखला का समापन हुआ।

दीप से शुरू, अभिव्यक्ति से सम्पन्न

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन और प्रख्यात शिक्षाविद श्री राजीवकान्त मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया।

डॉ. चौधरी ने उद्घाटन भाषण में एक गहरी बात कह दी – जब मनुष्य से उसके भाव छीन लिए जाएं, तो वह मशीन बन जाता है। और जब मशीन में भाव आ जाएं, तो वह कला बन जाती है। कला ही हमें मानव बनाती है, और यही इस कार्यशाला का उद्देश्य रहा।

महिलाओं की मंजूषा, युवाओं की नजर से फोटो

इस कार्यशाला की ख़ास बात यह थी कि यह पूरी तरह से युवा और खासकर महिला कलाकारों को समर्पित थी। मंजूषा चित्रकला कार्यशाला में महिलाओं ने परंपरा को नए रंग दिए। फोटोग्राफी कार्यशाला में युवा कैमरों के ज़रिए दुनिया को देखने का नजरिया सीखा और फिर उसे फ्रेम में बांधकर पेश किया। मंच संचालन और नाटक कार्यशाला ने शब्द और अभिनय से अभिव्यक्ति को नया आयाम दिया।

चाय का हाता में ज़िन्दगी की झलक

कार्यक्रम में प्रशिक्षुओं द्वारा तैयार नाटक चाय का हाता का मंचन हुआ, जिसमें छोटे-छोटे संवादों और भावनाओं के ज़रिए बड़ी बातें कह दी गईं। वहीं मंच संचालन के प्रशिक्षुओं ने कार्यक्रम की कमान संभालकर अपनी कला का शानदार परिचय दिया।

सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, एक अनुभव

25 जुलाई से 30 अगस्त तक चली इस श्रृंखला में 150 से अधिक युवाओं ने भाग लिया, जिन्हें 11 वरिष्ठ कलाकारों और प्रशिक्षकों ने दिशा दिखाई। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने कहा कि ये कार्यशालाएं सिर्फ कला सिखाने का मंच नहीं थीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव थीं, जो युवाओं को आत्मविश्वास और संभावनाओं की दुनिया में ले गईं।

सम्मान और समापन

कार्यक्रम में सभी प्रशिक्षकों को प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह, और सभी सहभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। साथ ही, प्रतिभागियों द्वारा बनाई गई मंजूषा पेंटिंग और फोटोग्राफ्स की प्रदर्शनी ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया।

भागलपुर ने एक बार फिर साबित कर दिया – जहां युवा हैं, वहां अभिव्यक्ति की कोई सीमा नहीं। कला वहां सिर्फ चित्र नहीं, संवाद बन जाती है; नाटक वहां सिर्फ मंच नहीं, ज़िंदगी बन जाती है।

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