पेसा कानून की आत्मा रूढ़िक और परम्परागत व्यवस्था है: बोदरा

खूंटी:तोरपा प्रखंड के जरिया पंचायत अंतर्गत पाटपुर गांव में मौजा अध्यक्ष सिल्वेस्टर सोय की अध्यक्षता में आहूत मौजा सभा में सभी 11 टोलों के अगुवा सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित हुए।
मौजा सभा को सम्बोधित करते हुए झारखण्ड उलगुलान संघ के संयोजक अलेस्टेयर बोदरा ने कहा कि ग्राम सभा कार्यकारिणी का वकालत करने वाले कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी लोग पिछले दरवाजे से झारखण्ड पंचायत राज अधिनियम 2001 का आधार मजबूत करने का रास्ता बनाने का काम कर रहे हैं। पेसा कानून की आत्मा रूढ़िक और परम्परागत व्यवस्था है और इसी व्यवस्था के तहत ही पारम्परिक ग्राम सभा की स्वायत्तता तथा आत्मनिर्णय के अधिकार को बरकरार रखा जा सकता है।
मसीहदास गुड़िया ने कहा कि झारखण्ड सरकार ने पेसा कानून के अनुरूप पेसा नियमावली नहीं बनाया है। पारम्परिक ग्राम सभा को सरकारी ग्राम सभा बना दिया गया है तथा पारम्परिक ग्राम सभा को ग्राम पंचायत के नियंत्रण में काम करना है।
बेनेदिक्त नवरंगी ने कहा कि पेसा नियमावली में पारम्परिक ग्राम सभा की बात तो कही गई है, लेकिन दायित्वों एवं कृत्यों में पारम्परिक अधिकार और आदर्श को शामिल नहीं किया गया है।
सभा में सलिल कोनगाड़ी, निस्तार सोय, जरका सोय, सायबा सोय, असरिता भेंगरा, अंजेला ढोढराय, बहालेन मुंडू, लिली मेरी सांगा, जोन कोनगाड़ी, फिलिप हेमरोम एवं मोजेस ओड़ेया सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।

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