16 तक वादा निभाइए, नहीं तो 18 से काम बंद, एमजीआर के कामगारों की चेतावनी, बोले – अब चुप नहीं बैठेंगे!

भागलपुर। एनटीपीसी कहलगांव के लिए मुश्किलों का सायरन बज चुका है। झारखंड मजदूर कल्याण संघ (जे.एम.के.स.) ने अपनी नाराजगी का सीधा-सीधा एलान कर दिया है – “एकरारनामा का पालन कीजिए, नहीं तो हम 18 सितंबर की सुबह से एम.जी.आर. का पहिया जाम कर देंगे!”

मालूम हो कि झारखंड मजदूर कल्याण संघ के बैनर तले एमजीआर में कार्यरत करीब 500 गेट मैन, गैंग मैन, पेट्रोलिंग गार्ड और अन्य श्रमिकों ने हाल ही में कामकाज ठप कर दिया था। हड़ताल की घोषणा करते हुए मजदूरों ने एमजीआर लाइन पर झंडा गाड़कर आंदोलन की शुरुआत कर दी थी।
संघ के नेताओं का कहना था कि 22 जुलाई को एनटीपीसी प्रबंधन और श्रमिक संघ के बीच यह स्पष्ट समझौता हुआ था कि सभी कर्मचारियों को हर माह की 10 तारीख तक वेतन भुगतान किया जाएगा। बावजूद इसके, सेक्शन टू के कामगारों को बीते दो माह से वेतन नहीं मिला है। अंततः प्रबंधन और संघ के बीच समझौता हुआ तथा सहमति पत्र के जरिए हड़ताल समाप्त हुआ।

सहमति-पत्र के प्रमुख बिंदु इस प्रकार थे :

वेतन भुगतान सुनिश्चित:
MGR ट्रैक लाइन से संबंधित सभी कामगारों का जुलाई माह का वेतन 16 अगस्त 2025 तक भुगतान कर दिया जाएगा। यदि किसी कारणवश ऐसा संभव नहीं हो पाता, तो N.T.P.C. प्रबंधन 22 अगस्त 2025 तक अपने स्तर पर वेतन का भुगतान करेगा।
पूर्व एकरारनामे की प्रगति पर बैठक:
दिनांक 22 जुलाई 2025 को डेहरी केबिन के पास प्रबंधन और संघ के प्रतिनिधियों के बीच किए गए पूर्व एकरारनामे की प्रगति हेतु 10 दिनों के भीतर एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी, जिसकी तिथि दोनों पक्ष आपसी सहमति से तय करेंगे।
हड़ताल अवधि का वेतन विवाद समाधान:
हड़ताल अवधि के वेतन भुगतान से संबंधित जिन कामगारों की समस्या है, उनका समाधान D-G.M. स्तर के अधिकारी करेंगे। इस हेतु कामगारों को D-G.M. साहब से संपर्क स्थापित कर MGR के वरीय अधिकारियों के माध्यम से समाधान कराया जाएगा।
आपसी सामंजस्य और वचनबद्धता:
N.T.P.C. प्रबंधन और कामगारों के बीच आपसी सामंजस्य बनाए रखने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने यह भी वचन दिया कि भविष्य में कोई पक्ष एक-दूसरे के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही नहीं करेगा तथा सभी कामगार पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कंपनी के कार्य में संलग्न रहेंगे।
संघ ने कहा कि यह सहमति-पत्र एक सकारात्मक पहल है, जिससे न केवल औद्योगिक शांति स्थापित होगी, बल्कि श्रमिकों और प्रबंधन के बीच विश्वास भी मजबूत होगा। इस मौके पर एनटीपीसी के कई अधिकारी और बड़ी संख्या में कामगार मौजूद रहे।
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दरअसल, यह कोई पहली बार नहीं है जब एनटीपीसी प्रबंधन और कामगारों के बीच वादे हुए और टूटे। लेकिन इस बार झामक संघ के केंद्रीय अध्यक्ष और पूर्व विधायक राजेश रंजन खुद मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने बाकायदा पत्र भेजकर ऐलान किया है कि अगर 16 सितंबर 2025 तक माँगें नहीं मानी गईं, तो 18 तारीख को सुबह 6 बजे से एम.जी.आर. (Merry-Go-Round सिस्टम) से जुड़े सभी कामगार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

क्या हैं कामगारों की मांगें?

कामगारों का गुस्सा सिर्फ तनख्वाह को लेकर नहीं है, बल्कि भरोसा टूटने का है। उनका कहना है कि बढ़े हुए वेतन का भुगतान अब तक नहीं किया गया, जनवरी 2025 से एरियर लंबित पड़ा है, कई वर्षों से संवेदक के पास वेतन अटका है, मृतक आश्रितों को अब तक नौकरी नहीं मिली और वर्करों को उनकी दक्षता के अनुरूप वेतन नहीं दिया गया है।

“ALC पाकुड़ में जो सहमति बनी थी, वह सिर्फ कागज़ों पर रह गई है। ज़मीनी हकीकत तो कुछ और है,” कहते हैं राजेश रंजन।

‘काम बंद तो ज़िम्मेदार प्रबंधन’ – संघ ने डाली ज़िम्मेदारी की गेंद एनटीपीसी के पाले में

पत्र में साफ लिखा गया है कि अगर एनटीपीसी को करोड़ों का घाटा होता है, तो उसके लिए कामगार नहीं, बल्कि प्रबंधन खुद जिम्मेदार होगा। इतना ही नहीं, संघ ने अपनी चेतावनी की कॉपी पटना, गोड्डा, भागलपुर और कहलगाँव के प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेज दी है।

“अब बातों से नहीं, काम से भरोसा मिलेगा” – मजदूरों का दो टूक संदेश

ऐसा नहीं है कि मजदूर सिर्फ नाराज हैं, वे अब ठान चुके हैं कि “ना सुनवाई होगी, ना काम होगा।” एनटीपीसी के लिए यह सीधा संकेत है कि अगर संवाद की जगह टालमटोल और वादा-खिलाफी रही, तो 18 तारीख को एमजीआर थम जाएगा।
अब देखने वाली बात ये होगी कि एनटीपीसी प्रबंधन इस चेतावनी को गंभीरता से लेता है या एक और हड़ताल को इतिहास बनने देता है।

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