आस्था, ज्ञान और सेवा का संगम बना कुप्पाघाट,महर्षि संतसेवी की 106वीं जयंती पर संतवाणी गूंजी
भागलपुर। कुप्पाघाट स्थित सत्संग हॉल शनिवार को आस्था और अध्यात्म के रंग में रंगा नजर आया। अवसर था महर्षि संतसेवी परमहंस महाराज की 106वीं जयंती का, जहां संतों के प्रवचनों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। समारोह के मुख्य अतिथि बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने संतों से आशीर्वाद लेकर स्वयं को धन्य बताया। मंच संचालन करते हुए कुप्पाघाट आश्रम में ‘विवेकानंद’ के नाम से प्रसिद्ध स्वामी सत्यप्रकाश बाबा ने कहा कि संत परंपरा में महर्षि संतसेवी जैसा गुरुसेवी शिष्य विरले ही हुए हैं। उन्होंने गुरु महर्षि मेंहीं महाराज के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया।
गुरुसेवी स्वामी भगीरथ बाबा ने महर्षि संतसेवी को चलता-फिरता ज्ञानकोष बताते हुए कहा कि वे जीवन की खुली पुस्तक थे, जिनसे सीखने की कोई सीमा नहीं थी। अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा के महामंत्री दिव्य प्रकाश ने गुरु-शिष्य परंपरा को रेखांकित करते हुए कहा कि महर्षि मेंहीं महाराज स्वयं कहते थे ‘जहां मैं रहूंगा, वहीं संतसेवी भी रहेंगे।’ स्वामी नरेशानंद ने कहा कि संत किसी धर्म या मजहब की सीमाओं में बंधे नहीं होते, वे संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए होते हैं। महर्षि संतसेवी इसी कारण हर वर्ग और हर धर्म के लोगों में लोकप्रिय रहे। गुरुचारणसेवी प्रमोद बाबा समेत अन्य संतों ने भी उनके जीवन, तप और साधना पर प्रकाश डाला। इससे पहले स्तुति प्रार्थना, ग्रंथपाठ और गुरु पूजा के साथ सत्संग की शुरुआत हुई।
महर्षि संतसेवी की जयंती पर कुप्पाघाट आश्रम श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। बिहार के किशनगंज, खगड़िया, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, बांका, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, पटना सहित उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब और झारखंड से भी हजारों श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने महर्षि मेंहीं और महर्षि संतसेवी महाराज के समाधि स्थल पर मत्था टेक कर आशीर्वाद लिया।
हजारों श्रद्धालुओं के लिए खिचड़ी का विशाल भंडारा आयोजित किया गया, जहां पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण कराया गया। इसके अलावा सशुल्क पूड़ी-जलेबी और सब्जी की भी व्यवस्था रही। शाम में दाल-भात-सब्जी का भंडारा चला। बाहर से आए श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए आश्रम परिसर में विशेष इंतजाम किए गए।



