मुरहू में पारंपरिक मारवाड़ी रीति रिवाजों के साथ होता है होलिका दहन,गोबर से होलिका और भक्त प्रह्लाद की प्रतिमा तैयार की जाती है

खूंटी: होली के पावन पर्व पर होलिका दहन का विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। मुरहू में मारवाड़ी समाज, विशेषकर श्री श्याम सुंदर माहेश्वरी के परिवार सहित अन्य समाजजनों द्वारा इस पर्व को वर्षों से पारंपरिक मारवाड़ी रीति-रिवाजों के साथ श्रद्धा और उत्साहपूर्वक मनाया जाता रहा है।

इस अवसर पर सरला साबू द्वारा गोबर से बने गोइठों को पारंपरिक तरीके से सजाया जाता है, जिसके पश्चात विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। होलिका दहन के लिए गोबर से ही होलिका और भक्त प्रह्लाद की प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। साथ ही एक विशेष ढाल भी बनाई जाती है, जिसे होलिका दहन के समय अग्नि के मध्य स्थापित किया जाता है। मान्यता है कि यही गोबर से निर्मित ढाल मारवाड़ी समाज के प्रमुख पर्व गणगौर में भी श्रद्धापूर्वक पूजी जाती है। गोइठों के पूजन की यह परंपरा समाज में पीढ़ियों से चली आ रही है।
मुरहू में इस अनूठी परंपरा को अब अन्य समाजों के लोग भी अपनाने लगे हैं, जो सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। होलिका दहन की रात्रि में लोग एकत्र होकर विधिपूर्वक पूजा करते हैं और श्रद्धा के साथ होलिका दहन संपन्न किया जाता है।
मारवाड़ी भजनों, पारंपरिक गीतों और भक्त प्रह्लाद की कथा के स्मरण के साथ मनाया जाने वाला यह आयोजन आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का सशक्त प्रतीक बन चुका है।

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