चितरपुर कॉलेज में एक सप्ताह के संकाय विकास कार्यक्रम का भव्य समापन
चितरपुर, रामगढ़।टर्टल फाउंडेशन फॉर रिसर्च एंड एजुकेशन ट्रस्ट, रामगढ़ तथा चितरपुर कॉलेज, चितरपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक सप्ताह के संकाय विकास कार्यक्रम का आज गरिमामय समापन समारोह संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम 21 सितंबर से 27 सितंबर 2026 तक “उच्च शिक्षा में प्रभावी शिक्षण, अधिगम एवं व्यावसायिक विकास” विषय पर आयोजित किया गया।समापन समारोह में चितरपुर कॉलेज की सहायक प्राध्यापक एवं आयोजन सचिव ज्योति कुमारी ने सभी अतिथियों, प्रबंधन सदस्यों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने एक सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न शैक्षणिक सत्रों एवं प्रमुख गतिविधियों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान प्रभावी शिक्षण, विद्यार्थी-केंद्रित अधिगम, मूल्यांकन एवं आकलन, शैक्षणिक नेतृत्व, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं शिक्षा, अनुसंधान कौशल, अंतर्विषयक अधिगम तथा व्यावसायिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए गए।
इस एक सप्ताह के संकाय विकास कार्यक्रम में झारखंड सहित कुल चार राज्यों से शिक्षक, शोधार्थी एवं प्रतिभागी जुड़े। विभिन्न राज्यों से प्रतिभागियों की सहभागिता ने कार्यक्रम को व्यापक शैक्षणिक मंच प्रदान किया तथा ज्ञान, अनुभव एवं विचारों के आदान-प्रदान को और समृद्ध बनाया।
समापन समारोह में मुख्य संरक्षक श्री शफीक अनवर, सचिव, चितरपुर कॉलेज; संरक्षक डॉ. सुनील कुमार अग्रवाल, वाणिज्य संकाय के अधिष्ठाता, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग एवं अध्यक्ष, टीएफआरई, रामगढ़; सह-संरक्षक डॉ. संज्ञा, प्राचार्या, चितरपुर कॉलेज; अध्यक्ष डॉ. आशीष आनंद, सचिव, टीएफआरई ट्रस्ट, रामगढ़ एवं सहायक प्राध्यापक, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग तथा कार्यक्रम समन्वयक अंजलि सिंह, टीएफआरई ट्रस्ट, सौम्या अग्रवाल ट्रस्टी टीएफआरई रामगढ़ की गरिमामयी उपस्थिति रही।
समारोह में प्रतिभागियों ने कार्यक्रम से संबंधित अपने प्रतिपुष्टि एवं अनुभव साझा किए। इसके पश्चात डॉ. सुनील कुमार अग्रवाल ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि एक शिक्षक को हमेशा सीखने की प्रक्रिया को जारी रखना चाहिए। शिक्षक का स्वयं सीखते रहना ही उसे एक बेहतर शिक्षक बनाता है। शिक्षक को केवल पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि स्वयं भी निरंतर सीखने वाला होना चाहिए, क्योंकि शिक्षा में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती।
इसके बाद डॉ. संज्ञा ने अपने समापन संबोधन में कहा कि चितरपुर कॉलेज का संकल्प गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ अनुसंधान एवं नवाचार को निरंतर बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में महाविद्यालय में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, सम्मेलनों तथा कार्यशालाओं का आयोजन करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को व्यापक शैक्षणिक मंच प्राप्त हो सके और वे नए विचारों, शोध एवं ज्ञान के आदान-प्रदान से जुड़ सकें। उन्होंने इस प्रकार के कार्यक्रमों को शिक्षा की गुणवत्ता एवं व्यावसायिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
इसके पश्चात डॉ. आशीष आनंद ने अध्यक्षीय संबोधन के माध्यम से शिक्षा, अनुसंधान एवं शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंत में चितरपुर कॉलेज के सहायक प्राध्यापक डॉ. ताराशंकर अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी रिसोर्स पर्सन्स, आयोजन समिति के सदस्यों, प्रबंधन के सदस्यों, संकाय सदस्यों एवं प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम की आयोजन सचिव ज्योति कुमारी ने कहा कि इस संकाय विकास कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षा में शिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाना, नवीन शिक्षण पद्धतियों को प्रोत्साहित करना तथा शिक्षकों के अनुसंधान एवं व्यावसायिक कौशल को सुदृढ़ करना था।
एक सप्ताह तक चले इस कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को ज्ञान, अनुभव, संवाद, सहयोग एवं व्यावसायिक विकास के अनेक अवसर प्रदान किए। विभिन्न राज्यों से जुड़े प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की अपेक्षा व्यक्त की।
इसके उपरांत चितरपुर कॉलेज की सहायक प्राध्यापक एवं आयोजन सचिव ज्योति कुमारी ने एक सप्ताह के संकाय विकास कार्यक्रम के औपचारिक समापन की घोषणा की। उन्होंने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, आयोजन समिति के सदस्यों, प्रबंधन, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम सीखने, अनुभव साझा करने और आगे बढ़ने की एक महत्वपूर्ण यात्रा रही।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ हुआ।
इस प्रकार यह संकाय विकास कार्यक्रम केवल एक आयोजन का समापन नहीं, बल्कि निरंतर सीखने, नवीन विचारों को अपनाने, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आगे बढ़ने की नई प्रेरणा के साथ संपन्न हुआ।


