राजभवन के समक्ष पिछले 97 दिनों से धरना पर महाविद्याल के शिक्षेत्तर कर्मचारी,किया भजन कीर्तन, आत्मदाह करने की कही बात

रांची: झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार ने अंगीभूत महाविद्याल के शिक्षेत्तर कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इससे इनलोगों के साथ भुखमरी जैसी समस्या उत्पन्न हो गई है। राज्य के अलग महाविद्यालय में कोई बीस साल तो कोई पच्चीस सालों से सेवा दे रहे थे। अचानक इनलोगों की सेवा को राज्य सराकर ने समाप्त कर दिया है। पूरे राज्य में करीब तीन सौ की संख्या में शिक्षेत्तर कर्मचारी हैं। इनलोगों की मुख्य मांग यूजीपी में संयोजन है। पिछले एक अप्रैल से इनलोगों का वेतन बंद है। अपनी मांगों के समर्थन में पिछले 97 दिनों से राजभवन के समक्ष धरना पर बैठे हुए हैं। राज्य सरकार इनलोगों से वार्ता तक करना जरूरी नहीं समझ रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन इनलोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अपनी मांगों के समर्थन में इनलोगों ने सरकार को जगाने के लिए पिछले दिनों धरना स्थल पर पूजा पाठ और हवन किया। धरना स्थल परपकौड़ा तला और वहीँ पर आम लोगों के बिक्री की गई। इसके बाद भी सरकार से वार्ता नहीं हुई। यही नहीं धरना स्थल पर जूता पालिस भी किया। धरना-प्रदर्शन के 97 दिन बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार का कोई ध्यान नहीं है। शिक्षेत्तर कर्मचारियों ने बुधवार को भजन कीर्तन कर राज्य सरकार को जगाने का काम किया है। भारी बारिश में भी कर्मचारी धरण स्थल पर डटे हुए हैं।कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सौरभ मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार हमलोगों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। हमलोग अपने बच्चों को स्कूल फीस नहीं दे पा रहे हैं। भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है। जबतक हमलोगों की मांगों को सरकार नहीं मानती है तब तक हमलोग धरना स्थल पर ही रहेंगे। इसके बाद भी राज्य सरकार नहीं मानी तो अंतिम विकल्प आत्म दाह होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *