भागलपुर में किसानों की जमीन अब होगी डिजिटल पहचान के साथ दर्ज, सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और बैंक ऋण का रास्ता होगा आसान
भागलपुर। भागलपुर जिले के किसानों के लिए एक बड़ी और दूरगामी पहल की शुरुआत हो चुकी है। अब किसानों की जमीन से जुड़ी जानकारियां कागजों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित और प्रमाणिक रूप में दर्ज की जाएंगी। जिला कृषि विभाग ने किसानों की भूमि रजिस्ट्री को डिजिटलीकृत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।इस नई व्यवस्था के तहत किसानों की भूमि जोत का न केवल डिजिटलीकरण किया जाएगा, बल्कि जियो-मैपिंग के जरिए खेतों का डिजिटल नक्शा भी तैयार किया जाएगा। प्रत्येक किसान को उसकी भूमि स्वामित्व से जुड़ी एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूनिक आईडी) दी जाएगी, जिससे उसकी पहचान और सत्यापन प्रक्रिया सरल और पारदर्शी हो जाएगी।बकौल कृषि पदाधिकारी (डीएओ) प्रेम शंकर प्रसाद ‘कृषि ढांचे को डिजिटल रूप देने का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि समेत अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी जटिलता के उपलब्ध कराना है। आज के समय में सब्सिडी, आपदा राहत, फसल बीमा और बैंक ऋण जैसी सुविधाओं के लिए किसानों की पहचान और भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। यूनिक आईडी आधारित डिजिटल रजिस्ट्री से यह समस्या समाप्त हो जाएगी।’ डिजिटल रजिस्ट्री में किसानों की सभी जोतों और खेतों का पूरा विवरण ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा। इससे अलग-अलग जमीन के लिए भौतिक दस्तावेज संभालने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। एक ही आईडी के जरिए किसान अपनी भूमि से जुड़ी सारी जानकारी प्रस्तुत कर सकेंगे।कृषि विभाग ने पहले चरण में लगभग एक लाख किसानों के भूमि अभिलेखों को डिजिटल करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए जिले भर में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में किसान, सर्किल अधिकारी, हल्का कर्मचारी (पटवारी), भूमि राजस्व अधिकारी, प्रखंड कृषि अधिकारी और अनुमंडल स्तर के अधिकारी शामिल हो रहे हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी की जा सके।
किसानों की रजिस्ट्री में नामांकन के लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज तय किए गए हैं, जिनमें – आधार कार्ड (सक्रिय मोबाइल नंबर से जुड़ा, ओटीपी सत्यापन हेतु), मोबाइल नंबर, भूमि राजस्व रसीद, स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज, भूमि कब्जा प्रमाण पत्र, आधार से लिंक बैंक खाता प्रमुख है।
किसान चाहें तो स्वयं ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं या फिर किसान सलाहकार, कृषि समन्वयक और कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) द्वारा लगाए गए ग्राम स्तरीय शिविरों में जाकर नामांकन करा सकते हैं। नामांकन फॉर्म जमा होने के बाद भूमि से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन हल्का कर्मचारी द्वारा किया जाएगा। इसके साथ ही आधार प्रमाणीकरण के जरिए ई-केवाईसी पूरी की जाएगी, जिससे डेटा की शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।डीएओ का मानना है कि यह डिजिटल किसान रजिस्ट्री केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि सरकार के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगी। इससे योजनाओं की बेहतर रूपरेखा तैयार करने, नीति निर्धारण और संसाधनों के सही आवंटन में मदद मिलेगी। विशेष शिविरों के माध्यम से और बाद में पंचायत स्तर पर इस योजना को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। आने वाले समय में यह पहल किसानों और उनके परिवारों के जीवन में सकारात्मक और बड़ा बदलाव लाने वाली साबित होगी।



