एसीबी के दर्ज 6 शिकायतों के बावजूद भ्रष्ट पदाधिकारी को बनाया ऊर्जा विभाग का बॉस…बाबूलाल मरांडी

रांची : पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हाल ही में ग्रामीण विकास मंत्री द्वारा तत्कालीन विभागीय सचिव के सीआर में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की गई थी। इसके बावजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें अपने ऊर्जा विभाग का सचिव, सीएमडी तथा जेबीवीएनएल के एमडी जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सौंप दी।

कहा कि झारखंड की ऊर्जा संपदा को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाने वाली इस सरकार ने नैतिकता की सारी हदें पार कर दी हैं। एक ऐसे अधिकारी को ऊर्जा विभाग का ‘सुपर बॉस’ बनाना जिसके खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो में छह-छह शिकायतें दर्ज हों और जो ईडी की रडार पर रहा हो राज्य की जनता के गाल पर करारा तमाचा है।

कहा कि मुख्यमंत्री का भ्रष्ट अधिकारियों के प्रति विशेष लगाव रहा है। अनुराग गुप्ता, विनय चौबे, पूजा सिंघल, छवि रंजन, राजीव बख्शी सहित कुछ अन्य भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों को महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली पदों पर नियुक्त किया गया।

कहा कि जिस अधिकारी को उसके संदिग्ध आचरण के कारण पहले एक महत्वपूर्ण विभाग के सचिव पद से बेआबरू होकर हटना पड़ा, उसे आखिर किस डील के तहत मुख्यमंत्री ने इतनी बड़ी ताकत सौंप दी?

कहा कि जब मंत्री द्वारा अधिकारी के कार्यप्रणाली पर आपत्ति दर्ज की गई थी, तो फिर आपके द्वारा इतने अहम पदों पर पुनः नियुक्ति का आधार क्या रहा?

कहा कि उनका यह बयान सिद्ध हो गया कि जितना बड़ा भ्रष्टाचारी, उतना बड़ा पदाधिकारी! पहले वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर जी और अब दीपिका पाण्डेय जी के मंतव्यों को नजरअंदाज कर सीएम ने सिद्ध कर दिया कांग्रेस कोटे के मंत्री और विधायकों की इस सरकार में कोई हैसियत नहीं। ग्रामीण विकास मंत्री को समझना होगा कि प्रतिकूल लिखने से कुछ नहीं होने वाला क्योंकि इस शासन का मूल मंत्र ही यही है कि जो जितना भ्रष्ट अधिकारी उसे उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी। आपत्ति तो जैसे उस अधिकारी के लिए पदोन्नति का आधार बन गई क्योंकि यहां दागदार होना ही सबसे बड़ी योग्यता है।

कहा कि राज्य की जनता देख रही है कि कैसे सत्ता की मलाई बांटने के लिए नियम-कायदों और शुचिता की बलि दी जा रही है।

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