सारथी नेटवर्क के स्थापना दिवस पर जल-जंगल-जमीन संरक्षण को लेकर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

खूंटी: झारखंड जस्ट ट्रैन्ज़िशन नेटवर्क और लोक स्वर  के संयुक्त तत्वावधान में सारथी नेटवर्क के वार्षिक स्थापना दिवस के अवसर पर खूंटी प्रखंड के फुदी पंचायत अंतर्गत सिल्दा गांव में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सिल्दा, डांडोल, डुंगरा, कलामाटी एवं चालागी गांवों के ग्राम प्रधानों सहित महिला समूहों की नेत्रियां, किशोरी समूह की सदस्याएं, वार्ड सदस्य, सहिया एवं सेविकाओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान फोकस ग्रुप डिस्कशन आयोजित किया गया, जिसमें बढ़ते तापमान, हीट वेव, जल संरक्षण, जंगल एवं जमीन की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने झारखंड की पहचान “जल-जंगल-जमीन” को सुरक्षित रखने के लिए सामुदायिक स्तर पर पहल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस अवसर पर प्रतिभागियों के बीच पौधों का वितरण किया गया तथा गांव पंचायत क्षेत्र में जागरूकता रैली निकाली गई। रैली के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने पेसा (PESA) कानून के सहयोग से गांव की प्राकृतिक संपदाओं एवं संसाधनों की रक्षा करने की सामूहिक शपथ ली।

लोक स्वर की सचिव शालिनी समवेदना ने सारथी नेटवर्क की सोच एवं उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सारथी झारखंड के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत 43 सामाजिक संगठनों का साझा नेटवर्क है, जो न्यायपूर्ण बदलाव, पर्यावरण संरक्षण एवं समुदाय आधारित विकास के लिए कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोक स्वर के समन्वयक गुंजन बेदिया, फील्ड कोऑर्डिनेटर सुमन सनीचरेया, बिट्टू, महिला समूह सदस्य हीरा देवी, प्रियंका, सुमितरा देवी एवं गांव के सरकारी विद्यालय के शिक्षक दिनेश ने गांव एवं पंचायत स्तर पर प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एवं बढ़ती गर्मी का प्रभाव ग्रामीण जीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, इसलिए समुदाय को संगठित होकर जल, जंगल एवं जमीन की रक्षा के लिए आगे आना होगा।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन, बढ़ती गर्मी एवं हीट वेव के प्रति ग्रामीण समुदायों को जागरूक करना तथा सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को मजबूत बनाना था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *