झारखंड के इतिहास में पहली बार एक साथ 28 पुलिस कर्मी सस्पेंड
बोकारो – झारखंड के इतिहास में संभवत पहली बार बोकारो जिला में 28 पुलिस कर्मी को अभियुक्त से सांठगांठ के आरोप में पूरा पिंडराजोडा थाना के पुलिस पदाधिकारी और कर्मी को एक साथ सस्पेंड कर दिया गया।जिनमें 10 सब इंस्पेक्टर, पांच असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर, दो हवलदार और 11 सिपाही शामिल है। बोकारो जिला पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह के द्वारा शनिवार की देर रात प्रेस रिलीज जारी कर बताया गया कि 24 जुलाई 2025 को ग्राम खुंटाडीह की रहने वाली रेखा देवी ने अपनी 18 वर्षीय पुत्री कुमारी पुष्पा महतो के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।इस संबंध में पिण्ड्राजोरा थाना में कांड संख्या 147/25 दर्ज किया गया था।शुरुआती जांच में यह पाया गया कि थाने में तैनात पुलिस पदाधिकारी जांच के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे। जांच की समीक्षा के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि पुलिसकर्मी जानबूझकर केस को कमजोर कर रहे थे ताकि अभियुक्त को बचाया जा सके। उन पर आरोप है कि उन्होंने अभियुक्तों के साथ मिलकर पार्टियां कीं, केस को रफा-दफा करने के लिए पैसों का लेन-देन किया, थाने की गोपनीयता को भंग किया।जब मामले की गंभीरता बढ़ी, तो सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में एक विशेष टीम एस आई टी का गठन किया गया। इस नई टीम ने तत्परता दिखाते हुए महज एक दिन में न केवल मुख्य अभियुक्त दिनेश महतो को गिरफ्तार किया, बल्कि उसकी निशानदेही पर मृतका के कंकाल की हड्डी, कपड़े ,बाल ,रबर बैंड ,हत्या में प्रयुक्त चाकू भी बरामद किया गया ।पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह ने बताया कि युवती द्वारा शादी दबाव दिया जा रहा था ।लेकिन आरोपी इससे इंकार कर रहा था।अपने रास्ते से हटाने के लिए उसने चाकू से गोदकर उसकी हत्या की और वहीं छोड़कर भाग गया था।विदित हो कि पुष्पा 21 जुलाई 2025 से लापता थी ,तलाश पर 25000 ईनाम रखा गया था ।युवती के नहीं मिलने पर परिजनों ने हाइकोर्ट का रुख किया ।मामले में हाइकोर्ट ने पुलिस की करवाई को लेकर फटकार लगाई थी ।डीजीपी से लेकर एसपी तक को कोर्ट में हाजिर होना पड़ा था ।हाइकोर्ट ने मामले की जांच डीआईजी स्तर की वन मैंन कमिटी से कराने की बात कही थी ।बीते शुक्रवार व शनिवार को डीआईजी बजट संध्या रानी मेहता ने बोकारो पहुंचकर जांच की थी ।मामले की अगली सुनवाई अब 15 अप्रैल को है ।



