जल-मृदा संरक्षण पर वर्कशॉप, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने योजनाओं में तेजी के दिए निर्देश

रांची: जल संरक्षण, मृदा संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देकर ही किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच कृषि को टिकाऊ और जलवायु अनुकूल बनाने के लिए योजनाओं का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। इसी उद्देश्य से जेएमटीटीसी भवन में भूमि संरक्षण निदेशालय की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने अधिकारियों को योजनाओं में तेजी लाने और शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का निर्देश दिया।
मंत्री ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका वास्तविक असर खेतों और किसानों की जिंदगी में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने तालाब, पर्कोलेशन टैंक (PT), डीप बोरिंग और BPCD जैसी योजनाओं के स्थल चयन और पहचान की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा। पिछले वर्ष की देनदारियों और बकाया भुगतान को अगस्त के अंत तक पूरा करने का निर्देश देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा नहीं होने पर संबंधित अधिकारी जवाबदेह होंगे।
कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन (SMAM) की समीक्षा के दौरान मंत्री ने इस वर्ष शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए तत्काल कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष प्राप्त पात्र आवेदनों को केवल स्वीकृति नहीं मिलने के कारण निरस्त नहीं किया जाए, बल्कि चालू वित्तीय वर्ष में नियमानुसार उन पर विचार किया जाए।
मंत्री ने प्रत्येक जिले में पिछले पांच वर्षों में लागू भूमि संरक्षण योजनाओं का Social Impact Study कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी योजना की सफलता केवल निर्माण पूरा होने से नहीं, बल्कि उससे किसानों और ग्रामीण समुदाय के जीवन में आए बदलाव से तय होनी चाहिए।
जीओ-टैगिंग से होगी योजनाओं की निगरानी
योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय डैशबोर्ड विकसित करने और सभी योजनाओं की जीओ-टैग्ड तस्वीरें दर्ज करने का निर्देश दिया गया। इससे योजनाओं की प्रगति की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी।
उन्होंने 15 अगस्त के बाद सभी जिलों में जिला परिषद सदस्यों, प्रमुख, मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने को कहा। साथ ही जल संरचनाओं के आसपास सामूहिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
BPCD के तहत अगले 15 दिनों में स्थल चयन और प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान तीन लाभुक महिला समूहों के बीच ट्रैक्टर का वितरण भी किया गया। मंत्री ने कहा कि कृषि यंत्रीकरण से महिला समूहों और किसानों को सशक्त बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
मौके पर विभागीय सचिव अबूबकर सिद्दीक़, भूमि संरक्षण निदेशक विकास कुमार समेत विभाग के वरीय अधिकारी मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *