विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिएअधिग्रहित होगी 187.765 एकड़ भूमि
भागलपुर। इस वर्ष अक्टूबर – नवंबर माह में बिहार विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। चुनाव से पूर्व ऐतिहासिक विक्रमशिला विश्वविद्यालय के समीप प्रस्तावित केंद्रीय विश्वविद्यालय के निर्माण की क़वायद अब तेज कर दी गई है। किसानों की 187.765 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की जाएगी। इस संबंध में जिला प्रशासन द्वारा प्रारंभिक अधिसूचना जारी कर रकबा विवरण सार्वजनिक किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंतीचक मौजा की 92.15 एकड़ तथा मलकपुर मौजा की 95.615 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की जाएगी। अंतीचक के 105 और मलकपुर के 119 रैयतों की भूमि अधिग्रहण के दायरे में आएगी। वहीं प्रशासन द्वारा जारी अधिसूचना में बताया गया है कि अंतीचक मौजा की 24.12 एकड़ जमीन बिहार सरकार की अनावाद भूमि है, जबकि 1.65 एकड़ जमीन शिक्षा विभाग के खाते में दर्ज है। मलकपुर मौजा में 1.82 एकड़ भूमि बिहार सरकार की अनावाद भूमि पाई गई है। गौरतलब है कि अधिग्रहण की जाने वाली 98 प्रतिशत जमीन पर आम, ताड़, बांस, कटहल और सागवान के बाग-बगीचे हैं। क्षेत्र में चार से पाँच पक्के मकान और झोपड़ियां मौजूद हैं।
प्रशासन ने घोलटर मंडल उच्च विद्यालय के 3.37 एकड़ क्षेत्रफल वाले आमबाग को भी अधिग्रहण सूची में शामिल किया है। अधिसूचना के अनुसार, 60 दिनों के भीतर किसी भी प्रकार की आपत्ति जिला भू-अर्जन कार्यालय में दर्ज कराई जा सकती है।
सार्वजनिक संपत्तियों को नहीं होगा नुकसान :
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि प्रस्तावित परियोजना को लेकर सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना के कार्यान्वयन से किसी भी सार्वजनिक संपत्ति जैसे स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, डाकघर, खेल का मैदान, धार्मिक स्थल या सरकारी भवन को कोई क्षति नहीं होगी। न ही सड़क या विद्युत आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होगी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि विश्वविद्यालय की स्थापना से अंतीचक, मलकपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त करने में सुविधा होगी।
क्षेत्रीय विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी :
DL&EO ने बताया कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि परियोजना से आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों में आवास, शिक्षा, व्यवसाय, रोजगार और कुटीर उद्योग जैसे नए अवसर खुलेंगे। इससे न सिर्फ आर्थिक बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक विकास को भी बल मिलेगा।
भूमि की क्षति की तुलना में, स्थानीय जनसंख्या को अधिक सामाजिक और आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे। सरकार द्वारा इन क्षेत्रों में सामाजिक बुनियादी ढांचे के विकास की संभावनाएँ भी मजबूत होंगी, जिससे क्षेत्र का समग्र और टिकाऊ विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा।



