शिक्षा के मंदिर में न्याय की दस्तक: राजभवन पहुंचा TMBU के 70 अतिथि शिक्षकों का मामला, सम्मान और अधिकार की उठी आवाज
भागलपुर: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के 70 अतिथि शिक्षकों का मामला अब राजभवन तक पहुंच गया है। यह मुद्दा केवल नियुक्ति या प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता, शिक्षकों के सम्मान और हजारों विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

इसी क्रम में आज बिहार लोक भवन (राजभवन) में राज्यपाल-सह-कुलाधिपति महोदय से ऊर्जा विभाग के मंत्री शैलेश कुमार बुलो मंडल ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने TMBU के 70 अतिथि शिक्षकों से जुड़े गंभीर मामले को प्रमुखता से उठाते हुए निष्पक्ष और त्वरित न्याय की मांग की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इन अतिथि शिक्षकों ने लगभग 11 माह तक विश्वविद्यालय में नियमित रूप से अध्यापन कार्य किया। इसके बावजूद उन्हें मानदेय का भुगतान नहीं किया गया और बाद में उनकी नियुक्ति भी रद्द कर दी गई। इस फैसले से न केवल 70 शिक्षकों और उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई, बल्कि विश्वविद्यालय में अध्ययनरत हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया।
बैठक में राज्यपाल महोदय से आग्रह किया गया कि नियुक्ति प्रक्रिया, अभ्यर्थियों की शैक्षणिक एवं प्रशैक्षणिक योग्यताओं तथा उनके द्वारा किए गए अध्यापन कार्य का निष्पक्ष परीक्षण कराया जाए। साथ ही, सभी तथ्यों के आधार पर शीघ्र न्याय सुनिश्चित कर शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के मामलों का समयबद्ध समाधान नहीं होता, तो उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों का मनोबल प्रभावित हो सकता है। वहीं, विद्यार्थियों की पढ़ाई की निरंतरता भी बाधित होने की आशंका बनी रहती है।
अब सबकी निगाहें राजभवन की आगामी पहल पर टिकी हैं। शिक्षकों को न्याय, शिक्षा व्यवस्था की गरिमा और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा को लेकर यह मामला आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है। शिक्षा जगत को उम्मीद है कि मानवीय संवेदनाओं और न्यायसंगत तथ्यों के आधार पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा, जिससे शिक्षकों का सम्मान और युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।


