अब मखाना सिर्फ स्नैक नहीं, पापड़ भी: बिहार से निकला 100% मखाना पापड़, किसानों के लिए खुले नए बाजार

भागलपुर। बिहार की पहचान बन चुके सुपरफूड मखाना ने अब एक और बड़ी छलांग लगाई है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), साबौर ने स्टार्टअप्स के सहयोग से भारत का पहला 100 प्रतिशत मखाना पापड़ लॉन्च किया है। यह नवाचार न सिर्फ मखाने को नई पहचान देगा, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण उद्यमिता को मजबूती देने और वैश्विक बाजार में बिहार की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।

    यह उत्पाद भारत सरकार की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना–रफ्तार (RKVY-RAFTAAR) के तहत विकसित एक स्टार्टअप ने तैयार किया है। इसका विकास बीएयू के कृषि व्यवसाय इनक्यूबेशन केंद्र SABAGRIs के तकनीकी मार्गदर्शन में हुआ है। खास बात यह है कि यह पापड़ पूरी तरह मखाने से तैयार किया गया है, जिससे इसे स्वास्थ्यवर्धक और प्रीमियम फूड प्रोडक्ट के रूप में देखा जा रहा है।

     बीएयू के कुलपति डॉ. आर. सिंह ने इसे कृषि-खाद्य नवाचार के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे मखाना उत्पादों में विविधता आएगी, किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और घरेलू के साथ-साथ निर्यात बाजारों में भी नए अवसर पैदा होंगे। उनके अनुसार शोध, तकनीक और उद्यमिता के समन्वय से स्थानीय संसाधनों को वैश्विक स्तर के उत्पादों में बदला जा सकता है।

    अनुसंधान निदेशक एवं SABAGRIs के नोडल अधिकारी डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि बिहार की कृषि-व्यवसाय नवाचार क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि इनक्यूबेशन केंद्र स्टार्टअप्स को तकनीकी सत्यापन, उत्पाद विकास, व्यावसायिक मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने में सहयोग दे रहा है, जिससे मखाना मूल्य श्रृंखला को मजबूती मिलेगी और किसानों की लाभप्रदता बढ़ेगी।

    बीएयू पहले ही मखाना आटा, फ्लेवरयुक्त मखाना और मखाना पास्ता जैसे कई उत्पाद विकसित कर चुका है। अब 100 प्रतिशत मखाना पापड़ के जुड़ने से मखाना आधारित उत्पादों की श्रृंखला और विस्तृत हो गई है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य बिहार को मखाना आधारित खाद्य नवाचारों का वैश्विक केंद्र बनाना है। यह सिर्फ एक नया उत्पाद नहीं, बल्कि बिहार के मखाना किसानों के लिए बेहतर बाजार, अधिक आय और कृषि आधारित स्टार्टअप्स के नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है।

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