सुलतानगंज गोलीकांड : 12 दिन तक मौत से लड़ते रहे मुख्य पार्षद राजकुमार गुड्डू, आखिर हार गई जिंदगीप्रदीप विद्रोही
भागलपुर। सुलतानगंज नगर परिषद कार्यालय में हुए चर्चित गोलीकांड ने आखिरकार एक और जान ले ली। मुख्य पार्षद राजकुमार गुड्डू ने शनिवार सुबह पटना के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। 12 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद उनके निधन की खबर मिलते ही सुलतानगंज समेत पूरे भागलपुर में मातम पसर गया। मालूम हो कि इस गोलीकांड में कार्यालय के भीतर करीब सात राउंड फायरिंग हुई। मुख्य पार्षद को बचाने के दौरान कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार गोली का शिकार हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
इस सनसनीखेज हमले में पहले ही कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार की मौत हो चुकी थी। अब मुख्य पार्षद के निधन के बाद मामला और भी गंभीर हो गया है। शहर में तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है और कई इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है।
बताया जाता है कि 28 अप्रैल को नगर परिषद कार्यालय में सैरात की डाक के दौरान अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी। हमले में राजकुमार गुड्डू को तीन गोलियां लगी थीं। एक गोली सिर में और दूसरी छाती में धंस गई थी। गंभीर हालत में पहले उन्हें भागलपुर के मायागंज अस्पताल ले जाया गया, फिर बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया था।
डॉक्टरों के मुताबिक हालत बेहद नाजुक थी। पल्स रेट लगातार गिरने के कारण सिर में फंसी गोली नहीं निकाली जा सकी। पिछले सात दिनों से वे वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहे थे।
घटना के दिन नगर परिषद कार्यालय में अफरातफरी का माहौल बन गया था। लुंगी और मुरेठा बांधे तीन बदमाश झोले में हथियार छिपाकर दफ्तर में दाखिल हुए और अचानक गोलियां बरसानी शुरू कर दीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार्यालय के भीतर करीब सात राउंड फायरिंग हुई। मुख्य पार्षद को बचाने के दौरान कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार गोली का शिकार हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई थी। फुटेज में चार अपराधी बुलेट बाइक से आते दिखाई दिए थे। जांच के दौरान मुख्य आरोपी ‘रामधनी’ की पहचान हुई, जिसे बाद में पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया।
हालांकि, मुख्य पार्षद की मौत के बाद लोगों में गुस्सा और दुख दोनों गहरा गया है। अस्पताल से लेकर उनके घर तक समर्थकों और स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार निगरानी कर रही है।



