नाग पंचमी पर नदी से निकाले विषधर, गले में लपेटकर निकली शोभायात्रा
समस्तीपुर : नाग पंचमी के अवसर पर मंगलवार को जिले के खानपुर बाजार स्थित विषहर स्थान एवं समस्तीपुर-बहेरी मुख्य मार्ग के मनवारा गांव स्थित विषहर मंदिर में आस्था, लोक परंपरा और रोमांच का अनूठा संगम देखने को मिला। सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए भगतों ने बूढ़ी गंडक नदी में स्नान किया और धार्मिक मान्यता के अनुसार विषधर सांपों को हाथों में लेकर मंदिर पहुंचे। पूजा-अर्चना के बाद विषधर नागों के साथ शोभायात्रा निकाली गई, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
सुबह से ही बूढ़ी गंडक नदी के घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय विषहरी माता’ के जयघोष के बीच भगतों ने पहले नदी में स्नान किया। इसके बाद पारंपरिक मान्यता के अनुसार नदी से विषधर सांपों को निकाला गया। सांपों को हाथों और गले में धारण कर श्रद्धालु विषहर स्थान पहुंचे, जहां विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंदिर परिसर में नाग देवता को दूध, लावा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की गई।
जिले के खानपुर स्थित विषहर स्थान पर पुजारी रामदेव महतो भगत और सीताराम पंडित ने पूजा संपन्न कराई। पूजा के बाद दोनों ने धार्मिक परंपरा के तहत विषधर सांपों को हाथों और गले में धारण कर श्रद्धालुओं के बीच पारंपरिक प्रदर्शन किया। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद लोग पूरे आयोजन को अपने मोबाइल फोन में कैद करते नजर आए। बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे पूजा-अर्चना में शामिल हुए। इसके बाद विषधर नागों के साथ शोभायात्रा खानपुर बाजार से होकर निकाली गई। सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। कई लोगों ने घरों और दुकानों की छतों से भी इस आयोजन को देखा। पूरे बाजार में मेले जैसा माहौल बना रहा। उधर, समस्तीपुर-बहेरी मुख्य मार्ग स्थित मनवारा गांव के विषहर मंदिर में भी नाग पंचमी पर वर्षों पुरानी परंपरा निभाई गई। यहां पुजारी रामचंद्र भगत ने विशेष पूजा-अर्चना के बाद विषधर सांपों के साथ धार्मिक अनुष्ठान किया। आसपास के गांवों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने आयोजन में भाग लिया और नाग देवता की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। नाग पंचमी के अवसर पर वन्यजीव संरक्षण कानून को लेकर प्रशासन और वन विभाग की ओर से लोगों से जंगली सांपों को नहीं पकड़ने तथा उनका सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं करने की अपील की जाती रही है। इसके बावजूद खानपुर और मनवारा में पारंपरिक तरीके से यह आयोजन किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और मिथिला की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। आयोजन को सफल बनाने में रामविलास महतो, कैलाश महतो, भवेश महतो, किसुन प्रसाद, अकलू राय, दिलीप महतो, दिलीप कुमार, रामलखन महतो सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सक्रिय भूमिका निभाई। दिनभर मंदिर परिसर और बाजार क्षेत्र में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। नाग पंचमी के इस आयोजन ने एक बार फिर मिथिलांचल की लोक आस्था, धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक प्रस्तुत की।

