तालाब की मछलियों पर कड़ी निगरानी, चार के दूसरे तालाब में तैर जाने का डर; राज्यसभा चुनाव में वोटों की रखवाली में जुटे सियासी मछुवारे
रांची: झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी चरम पर है। मतदान से ठीक पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने कुनबे को एकजुट रखने में जुटे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि कहीं उनके तालाब की कुछ मछलियां दूसरे तालाब का रुख न कर लें। ऐसे में दोनों खेमों के सियासी मछुवारे अपनी-अपनी मछलियों की कड़ी निगरानी कर रहे हैं।
राज्यसभा चुनाव के समीकरणों ने इस बार मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। एक-एक वोट की अहमियत को देखते हुए दल अपने विधायकों को साधने और उन्हें एकजुट रखने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि कहीं बैठकों का दौर चल रहा है तो कहीं विधायकों को एक साथ रखकर रणनीति बनाई जा रही है।
सियासी तालाब की कुछ मछलियां इन दिनों खास तवज्जो भी चाह रही हैं। उनकी अपनी राजनीतिक अपेक्षाएं, लंबित मांगें और भविष्य को लेकर आकांक्षाएं हैं। मौजूदा परिस्थितियों में उनकी अहमियत बढ़ गई है, इसलिए उन्हें मनाने और संतुष्ट रखने के लिए राजनीतिक गणित भी तेजी से चल रहा है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, कोई भी अपने खेमे में किसी तरह की नाराजगी या असंतोष का जोखिम नहीं लेना चाहता।
सूत्रों की मानें तो दोनों पक्षों की नजर खासकर उन विधायकों पर है, जिनकी गतिविधियों को लेकर चर्चाएं बनी हुई हैं। इसी कारण लगातार संपर्क, बैठकों और संवाद के जरिए उन्हें अपने पाले में बनाए रखने की कवायद जारी है।
मतदान में अब कुछ ही घंटे शेष हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि उनके तालाब की कोई मछली आखिरी वक्त में दिशा न बदल दे। यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव से पहले झारखंड की राजनीति में इन दिनों वोटों की रखवाली और विधायकों की निगरानी सबसे बड़ा राजनीतिक अभियान बन गया है।



