झारखंड के गारमेंट सेक्टर को लोकल से ग्लोबल बनाने की दिशा में आईआरजीए फाउंडेशन की रणनीतिक पहल
रांची: झारखंड के रेडीमेड गारमेंट एवं अपैरल उद्योग को संगठित, प्रतिस्पर्धी और वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने के उद्देश्य से झारखंड रेडीमेड गारमेंट अपैरल फाउंडेशन द्वारा रांची में रणनीतिक परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक में उद्योग की संरचनात्मक कमियों, व्यावहारिक चुनौतियों तथा गुणवत्ता, कौशल और कम्प्लायंस आधारित गारमेंट इकोसिस्टम के निर्माण पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता JRGA फाउंडेशन के चेयरमैन अभितभ श्रीवास्तव ने की। उन्होंने कहा कि झारखंड के गारमेंट सेक्टर को केवल उत्पादन आधारित सोच से आगे बढ़कर प्रोसेस-ओरिएंटेड और मार्केट-रेडी मॉडल अपनाने की आवश्यकता है, जिससे विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में राज्य की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
बैठक में T.A.P.E मॉडल (Tie & Dye, Accessories, Printing, Embroidery) को प्रोसेस मैन्युफैक्चरिंग फ्रेमवर्क के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो सिलाई से आगे बढ़कर वैल्यू एडिशन, जॉब वर्क के विविधीकरण, MSME सशक्तिकरण और महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देगा।
इसके साथ ही तसर सिल्क को आधार बनाकर ‘झारखंड सिल्क कॉरिडोर’ विकसित करने पर सहमति बनी। इसके अंतर्गत सिल्क उत्पादन, प्रोसेसिंग, डिजाइन, टेस्टिंग, क्वालिटी सर्टिफिकेशन, ब्रांडिंग और मार्केट लिंकेज को एकीकृत किया जाएगा। उद्योग प्रतिनिधियों ने स्किल ट्रेनिंग, क्वालिटी एश्योरेंस, ESG और सस्टेनेबिलिटी को भविष्य के लिए आवश्यक बताया।
इसी क्रम में DPIIT–QCI के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए परामर्श हुआ, जिसमें कम्प्लायंस सिस्टम और MSME सशक्तिकरण पर चर्चा की गई। JRGA फाउंडेशन ने सरकार और उद्योग के साथ मिलकर इन योजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रतिबद्धता



