राज्यसभा चुनाव: नाराजगी, बयानबाजी और सियासी गणित के बीच फंसी दूसरी सीट
रांची: झारखंड में राज्यसभा का चुनाव 18जून को होने वाला है। चुनावी मैदान में तीन प्रत्याशी हैं। महागठबंधन में झामुमो से बैद्यनाथ राम और कांग्रेस से प्रणव झा हैं। वहीं बीजेपी समर्थित परिमल नाथवानी भी मैदान में हैं। मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी समर्थित परिमल नाथवानी के बीच होने वाला है। वैसे महागठबंधन यदि एकजुट रहे तो दोनों सीट बड़े आसानी से जीत सकता है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने पहले कहा कि हमारे पास एन डी ए के दस विधायक संपर्क में हैं। इसके बाद कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने कहा कि तीन बीजेपी के विधायक हमारे संपर्क में हैं। झारखंड में अब साइक्लोजिकल वार शुरू हो गया है। एक दूसरे पर इस तरह की बातें शुरू हो गई है। चुनाव में हर दल मनोवैज्ञानिक लाभ लेने की कोशिश करती है। राजनीतिक पार्टियां मनोवैज्ञानिक ढंग से प्रेसर बिल्डअप करने की कोशिश करती है। इस तरह का माहौल बनाकर एक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि इस चुनाव में दूसरे दल के लोग भी हमारे टच में हैं। यह भी रणनीति का एक हिस्सा है। इस चुनाव में बीजेपी समर्थित परिमल नाथवानी के एंट्री से ही यह सब माहौल उत्पन्न हो रहा है। एन डी ए के पास 24 वोट है,जबकि इंडिया गठबंधन के पास 56 वोट। प्रथम वरीयता में दोनों सीटें गठबंधन आसानी से जीत लेंगे। लेकिन बड़ा अवाल महागठबंधन में एकजुटता है क्या। दूसरी बात बैद्यनाथ राम की जीत निश्चित मानी जा रही है। क्योंकि उनकी पार्टी के पास 34 विधायक हैं। उनके पास 6वोट सरप्लस है। मेन लड़ाई दूसरी सीट पर है। जिसमें कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी के बीच है। परिमल नाथवानी का यदि रिकॉर्ड देखा जाय तो झारखंड से दो बार राज्यसभा जा चुके हैं। 2008 और 2014 में दो दो बार वे राज्यसभा सांसद के रूप में चुने जा चुके हैं और पिछली बार वे आंधप्रदेश के चुनाव जीते थे। इसबार उन्होंने फिर से झारखंड ने एंट्री किया है। इस चुनाव में कांग्रेस और एन डी ए उमीदवार के बीच बहुत ही क्लोज कंटेस्ट होने वाला है।बहुत अधिक मतों का अंतर नहीं होगा।
ऐसी चर्चा चल रही है कि झामुमो अपने प्रत्याशी बैद्यनाथ राम को फस्ट प्रिफरेंस कम से कम तीस वोट दिलाएंगे। वहीं कांग्रेस को 26 वोट मैनेज करना है। 26 वोट में 4 राजद की है। राजद सबसे कमजोर कड़ी के रूप में मानी जा रही है। हेमंत सोरेन सरकार में राजद से एक मंत्री संजय प्रसाद यादव ने बताया कि कांग्रेस ने तो उनसे संपर्क भी नहीं किया है। इसके अलावा संजय यादव को कांग्रेस के प्रति मन में गुस्सा भी है। क्योंकि बिहार विधानसभा चुनाव में उनके पुत्र रजनीश यादव के कहलगाँव विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने भी अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए थे,यह गुस्सा भी है। इस गुस्से को राज्यसभा चुनाव में उतार सकते हैं। वैसे राजद में पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव का जो फरमान होगा उसका ये लोग पालन करेंगे। वैसे भी इंडिया गठबंधन के राजद फिलहाल शामिल है।इसके अलावा भाकपा माले के दो विधायक भी है जो इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी के पक्ष में हैं। चुनाव ने क्रॉस वेटिंग भी होती है।
वहीं राजनयिक जानकारों की मानें तो यह चुनाव पूरी तरह से सीएम हेमंत सोरेन के इर्द गिर्द घूम रही है। यदि वे चाहेंगे तो इंडिया गठबंधन पूरी तरह से दोनों सीट बड़े आसानी से जीत सकती है। यदि वे सुस्त होते हैं तो फिर आप समझ सकते हैं कि परिणाम क्या होने वाला है। क्योंकि परिमल नाथवानी के साथ लक्ष्मीनारायण है। वैसे इस चुनाव परिणाम के बाद झारखंड की राजनीति समीकरण भी बदलने की संभावना है।



