रावण की लंका जली, उमड़ा जनसैलाब,बारिश में भी भागलपुर बना उत्सव की धरती

गणादेश,भागलपुर:शाम ढलते ही जैसे पूरा नाथनगर धधक उठा – नहीं, यह कोई संकट नहीं था, बल्कि रावण के अंत की पुनरावृत्ति थी। सीटीएस मैदान पर जब दस सिरों वाला रावण धू-धू कर जला, तो हर जय श्रीराम की गूंज के साथ आकाश भी थर्रा उठा। करीब 20 हजार लोगों की भीड़, चारों ओर उल्लास और शंखध्वनि – विजयदशमी का ऐसा नजारा शायद ही किसी ने पहले देखा हो। जिले मे कुल 244 जगहों पर प्रतिमा स्थापित की गई थी। गत गुरुवार को भी कई स्थानों की प्रतिमा का विसर्जन हुआ।

आकाश में आतिशबाजी, मंच पर राम-सीता और लक्ष्मण का सजीव अभिनय, और उस पर हनुमान की गदा की गूंज – रामलीला की टीम ने मानो इतिहास को वर्तमान में उतार दिया।

कार्यक्रम के समापन पर जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी और एसएसपी हृदयकांत ने जैसे ही रावण के पुतले को अग्नि दी, पूरा मैदान धर्म की जय हो! के नारों से गूंज उठा। प्रशासन की चौकसी का आलम यह था कि इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद व्यवस्था में कोई कमी नहीं दिखी।

जिलाधिकारी डॉ. चौधरी ने कहा, त्यौहार हमें जोड़ते हैं, न कि तोड़ते हैं। वहीं एसएसपी हृदयकांत ने कहा, कुछ तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं, पर हम पूरी तरह तैयार हैं।

इस आयोजन की खास बात यह रही कि आसपास के 40 से अधिक गांवों से लोग इस दृश्य को देखने पहुंचे थे। बुजुर्गों ने राम राज्य की कल्पना की, तो बच्चों ने पहली बार देखा कि बुराई का अंत कितना सुंदर हो सकता है।

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