झारखंड में प्रेसर पोलिटिक्स,झामुमो की नाराजगी कांग्रेस दूर कर पाएगी या हो जाएंगे अलग अलग !
रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) द्वारा दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा ने न केवल कांग्रेस बल्कि राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। महागठबंधन के भीतर पहले यह सहमति बनी थी कि कांग्रेस और झामुमो एक-एक सीट पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे, लेकिन अचानक झामुमो के रुख ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि झामुमो का यह कदम सीधे तौर पर गठबंधन तोड़ने की मंशा नहीं बल्कि ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ का हिस्सा हो सकता है। इसके पीछे बिहार विधानसभा चुनाव का उदाहरण भी दिया जा रहा है। उस समय झामुमो ने महागठबंधन में पर्याप्त सीटें नहीं मिलने पर पहले 12 सीटों और बाद में 6 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। पार्टी ने संभावित उम्मीदवारों को रांची तक बुलाया, लेकिन अंतिम समय में सभी को वापस भेज दिया गया और चुनाव में भाग नहीं लिया।
विश्लेषकों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में भी झामुमो इसी तरह का दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है ताकि कांग्रेस नेतृत्व उसकी राजनीतिक अहमियत को गंभीरता से ले। माना जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष या पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हो सकती है और दोनों दल फिर से एक-एक सीट पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर सकते हैं। वैसे भी सीएम हेमंत सोरेन का अबतक इस संदर्भ में बयान नहीं आया है।इसलिए फिलहाल संभावना है।
दिलचस्प बात यह है कि झामुमो ने अपने इस रुख से भाजपा समेत सभी राजनीतिक दलों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इससे पार्टी न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक चर्चा में भी बनी हुई है। वहीं कांग्रेस के झारखंड प्रभारी लगातार यह भरोसा दिला रहे हैं कि महागठबंधन में कोई संकट नहीं है और बातचीत के जरिए समाधान निकल जाएगा।
फिलहाल राज्यसभा चुनाव को लेकर झामुमो की रणनीति ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। अब सबकी निगाहें कांग्रेस और झामुमो नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं।



