डीएसपीएमयू में नारीवाद पर संगोष्ठी, विद्यार्थियों ने ग्रामीण क्षेत्रों का किया शैक्षणिक भ्रमण
रांची: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) के अंग्रेजी एवं भाषाविज्ञान विभाग द्वारा विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “नारीवाद” विषय पर संगोष्ठी तथा झारखंड ग्रासरूट्स इनोवेशन इंटर्नशिप के तहत ग्रामीण क्षेत्र भ्रमण का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में करीब 300 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विभागाध्यक्ष एवं विभाग समन्वयक डॉ. विनय भरत ने कहा कि नारीवाद केवल महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा नहीं, बल्कि समानता, न्याय और मानवीय गरिमा का व्यापक विमर्श है। मुख्य वक्ता डॉ. सुप्रिया आनंद और अदिति सिद्धांत ने नारीवादी साहित्यिक आलोचना के विभिन्न आयामों, नारीवाद की चार वेव्स, टोरिल मोई की फीमेल, फेमिनिन और फेमिनिस्ट अवधारणाओं तथा लौरा मल्वी के ‘मेल गेज़’ सिद्धांत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि समकालीन नारीवादी लेखन पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देते हुए स्त्री पात्रों को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है। इस अवसर पर विभाग की शिक्षिकाएं डॉ. करिश्मा पारिजात, रुचिका तस्कीन केरकेट्टा और नीलिमा कुमारी भी उपस्थित रहीं।
इसी क्रम में सेमेस्टर-6 (2023-27 बैच) के विद्यार्थियों ने डॉ. रश्मि कुमारी के मार्गदर्शन में तंगरबसली पंचायत के नारो और सकरा गांवों का शैक्षणिक भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने ग्रामीण जीवन, कृषि पद्धतियों, स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और ग्रामीण नवाचारों का अध्ययन किया तथा ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याओं और जीवनशैली को समझा। भ्रमण में अनुज उरांव, अशांत उरांव, हर्ष उरांव, स्वयम टैंक, अक्षय केरकेट्टा, काजल कुमारी, किशन चंद उरांव और हर्ष वर्धन सिंह ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम के समापन पर कुलपति प्रो. राजीव मनोहर और कुलसचिव डॉ. धनंजय वासुदेव द्विवेदी के संदेश का वाचन किया गया। उन्होंने कहा कि अकादमिक विमर्श और सामाजिक सहभागिता का यह समन्वय विद्यार्थियों में शोध-दृष्टि, आलोचनात्मक चिंतन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को और मजबूत करेगा।


