जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए रंगरा प्रखंड के वीर सपूत अंकित यादव, गांव में पसरा मातम, आंखों में अश्रुधारा और दिलों में गर्व

प्रदीप विद्रोही,भागलपुर। देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले रंगरा प्रखंड के चापर गांव निवासी अंकित यादव उर्फ धीरज यादव की शहादत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए इस बहादुर सपूत की खबर जब बुधवार को गांव पहुंची, तो हर दिल रो उठा। एक ओर मातृभूमि के लिए गर्व की भावना उमड़ी, तो दूसरी ओर अपने लाल को खोने का दर्द हर आंख से छलक पड़ा।

अंकित यादव अपने माता-पिता—लक्ष्मी यादव और सविता देवी—के इकलौते पुत्र थे। बचपन से ही देशभक्ति की भावना उनके भीतर कूट-कूट कर भरी थी। मिट्टी से खेलते हुए उन्होंने हमेशा तिरंगे को सलामी देने का सपना देखा था, जिसे उन्होंने सेना में भर्ती होकर पूरा किया। पर किसे पता था कि यह वीर इतना जल्दी देश के लिए अपनी जान न्यौछावर कर देगा।

गांव में शोक की लहर फैल गई है। हर कोई स्तब्ध है। पड़ोसी, रिश्तेदार और साथी सब गमगीन हैं, पर साथ ही उनके साहस और बलिदान पर गर्व भी है। अंकित न केवल एक जांबाज सैनिक थे, बल्कि एक सहज, सरल और सेवा भाव से ओतप्रोत इंसान भी थे। गांव के बुजुर्ग कहते हैं, “धीरज (अंकित) हमेशा मदद को आगे रहते थे, अब वो चुपचाप अमर हो गए।”

उनके अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीण बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही है। जनप्रतिनिधि, अधिकारी और हजारों ग्रामीण उनके स्वागत के लिए एकत्र हो रहे हैं—पर यह स्वागत अब तिरंगे में लिपटी एक चुप सफर की अंतिम बिदाई है।

गौर करने वाली बात यह है कि जिस वक्त गांव अपने लाल के आगमन की प्रतीक्षा कर रहा है, उसी समय बाढ़ की भयावह स्थिति ने पूरे क्षेत्र को अपने चपेट में ले रखा है। लोग एक ओर राहत और बचाव कार्यों में जुटे हैं, तो दूसरी ओर आंसुओं से भीगते अपने हीरो की अंतिम विदाई की तैयारी कर रहे हैं।

यह शहादत सिर्फ एक परिवार का दुःख नहीं है, यह पूरे रंगरा, नवगछिया और भागलपुर की आत्मा का भारीपन है। लेकिन यही बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर अमर रहेगा।

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