पंचायत उपबंध झारखण्ड नियमावली – 2025 मुंगेरीलाल के हसीन सपने जैसा : बोदरा
खूंटी : पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखण्ड नियमावली – 2025 मुंगेरीलाल के हसीन सपने जैसा है। पेसा कानून से असंगत नियमावली बनाकर आबुआ सरकार ने पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के आदिवासियों को ठगने का काम किया है। यह बात झारखण्ड उलगुलान संघ के संयोजक अलेस्टेयर बोदरा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा।
उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि इस नियमावली का निर्माण झारखण्ड पंचायत राज अधिनियम – 2001 की धारा – 131(1) द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए किया गया है, यह आदिवासियों के साथ बहुत बड़ा धोखा है, क्योंकि इसी अधिनियम की धारा – 10 के उपधारा – 9 में उल्लेखित है कि राज्य सरकार, साधारण या विशेष आदेश द्वारा ग्राम सभा को सौंपे गए कृत्यों में तथा कर्त्तव्यों में वृद्धि कर सकेगी या उन्हें वापस ले सकेगी। इससे स्पष्ट होता है कि आबुआ सरकार आदिवासियों के स्वशासन आधारित विशेषाधिकार को मजबूत करना नहीं चाहती है।
बोदरा ने यह भी कहा कि झामुमो नीत आबुआ सरकार से बहुत उम्मीद थी कि पेसा कानून से सुसंगत नियमावली बनाकर अनुसूचित क्षेत्र के आदिवासियों की चिरप्रतीक्षित आकांक्षा पूरी करेगी। पिछले विधानसभा चुनाव के समय झामुमो और कांग्रेस दोनों दलों ने यह वादा भी किया था। किन्तु, नियमावली निर्माण में आबुआ सरकार ने पेसा कानून के निर्देशों तक को दरकिनार कर दिया। पेसा कानून की धारा – 4 में स्पष्ट निर्देशित किया गया है कि राज्य विधानमंडल संविधान के भाग – 9 के अधीन कोई ऐसा विधि नहीं बनाएगा, जो पेसा कानून की विशिष्टयों से असंगत हो। साथ ही, धारा – 4(ढ) viii के माध्यम से भी निर्देश दिया गया है कि राज्य द्वारा निर्मित कानून उच्चत्तर स्तर की पंचायतें, निम्न स्तर की पंचायत या ग्राम सभा की शक्ति और अधिकार अपने हाथ में न ले लें, बल्कि, स्वायत्त शासन संस्था के रूप में सक्षम बनाने को अनिवार्य बताया गया है।
इसके बावजूद, वर्तमान झारखण्ड सरकार ने न सिर्फ पेसा कानून के विशिष्टयों को दरकिनार करने का काम किया है, बल्कि झारखण्ड के आदिवासियों के विशेषाधिकार को भी कमजोर करने का काम किया है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बहुत जल्द विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर व्यापक आन्दोलन किया जाएगा।



