जाम में फंसा जनजीवन, स्कूली बच्चों की पढ़ाई हो रही चौपट

भागलपुर। एनएच-80 के पिछले पांच वर्षों से कछुए की गति से हो रहे निर्माण और लगातार बढ़ते जाम ने लोगों का दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। खासकर कहलगांव के स्कूली बच्चों के लिए यह स्थिति किसी आफत से कम नहीं। स्कूल पहुंचने के वक्त कई-कई किलोमीटर लंबी कतारों में फंसे स्कूल वाहन और साइकिल से स्कूल जाने वाले बच्चे – ये सब बच्चों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर रहे हैं। मालूम हो कि इस जाम ने कहलगांव के कई माननीयों का भविष्य भी तय किया है। इस समस्या की चपेट में उनकी कुर्सियां भी जा चुकी हैं।

गौरतलब है कि मुंगेर से मिर्जाचौकी तक राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण और पीसीसी का काम करने के लिए दो भागों में टेंडर हुआ है. जिसमें मुंगेर से सुल्तानगंज होते हुए भागलपुर के दोग्च्छी के लिए 477. 54 करोड़ रुपए स्वीकृत हुआ है. वहीं, भागलपुर जीरोमाइल से कहलगांव होते हुए मिर्जाचौकी तक 566.15 करोड़ स्वीकृत हुआ है.

पिछले दो दशकों से यानी निर्माण कार्य शुरू होने से पूर्व से ही कहलगांव और आसपास के दर्जनों गांवों के स्कूली बच्चे कभी डेढ़ घंटे लेट स्कूल पहुंचते हैं यानी कभी समय पर पहुंच ही नहीं पाते। जाम ने इनकी स्कूली शिक्षा को धूल-धूसरित कर दिया है। इस सवाल पर वर्षों से गूंगे बने बैठे पुलिस प्रशासन के साथ-साथ माननीयों की चुप्पी भी कम दोषी नहीं है। हाल ही में एक माननीय जब कोर्ट (भागलपुर) जाने के क्रम में जाम में फंसे, तो उनका दो टूक जवाब था – ‘एनएच के निर्माण में लगी कंपनी के संवेदक मेरी नहीं सुनते।’ कुछ दिन बाद यही माननीय फिर जाम में फंसे दिखे और जाम हटाने की मशक्कत करते नजर आए। यह दोनों वीडियो सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर चुके हैं।

स्थानीय प्रशासन की ‘कुंभकर्णी नींद’ को जिसने भी झकझोरने की कोशिश की है, उन्हें मुकदमों में फंसाकर चुप कराया गया है। ‘कोढ़ में खाज’ बन चुकी इस समस्या में एनएच-80 के निर्माण में लगी कंपनी की लेटलतीफ़ी पर नकेल कसने वाला कोई नहीं है। कंपनी की हठधर्मिता के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले अक्सर पुलिस प्रशासन के निशाने पर आ जाते हैं।

स्कूली बच्चों के माता-पिता का कहना है कि बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचाना अब मुश्किल हो गया है। वहीं, घंटों ट्रैफिक में फंसे रहने से उनके स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क निर्माण में हो रही देरी ने क्षेत्र में आवागमन लगभग ठप कर दिया है। मालूम हो कि कहलगांव और आसपास के गांवों के करीब पाँच हजार बच्चे शहर के स्कूलों में पढ़ते हैं। इन बच्चों को रोज़ाना जाम की मार झेलनी पड़ रही है, जिसके कारण उनकी पढ़ाई भी लगातार बाधित हो रही है।

व्यापारियों का कहना है कि जाम के कारण सामान की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। नागरिकों ने संबंधित विभागों से निर्माण कार्य में तेजी लाने और वैकल्पिक ट्रैफिक प्रबंधन लागू करने की मांग की है, जिसे स्थानीय पुलिस प्रशासन की थोड़ी-सी सूझबूझ से आसानी से लागू किया जा सकता है। लेकिन प्रशासन की मंशा अब तक दिखी नहीं है।

लोगों का सवाल आज भी वही है – आखिर कब मिलेगा जाम से त्राण, और कब पूरा होगा एनएच-80 का निर्माण?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *