झारखंड राज्यसभा चुनाव: 16 विधायक वाली कांग्रेस क्यों दिख रही लाचार !

रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार में 16 विधायकों के साथ कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है, लेकिन इसके बावजूद राज्यसभा चुनाव में उसकी स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दे रही है। पार्टी के पास दावेदारों की कोई कमी नहीं है, फिर भी वह अपने दम पर उम्मीदवार उतारने की स्थिति में नहीं है।
दरअसल, राज्यसभा चुनाव में जीत का गणित ऐसा है कि कांग्रेस को अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए झामुमो के समर्थन की जरूरत है। यही वजह है कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और केंद्रीय नेतृत्व झामुमो सुप्रीमो एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से एक सीट कांग्रेस को देने की मांग कर रहे हैं। पार्टी के भीतर भी राज्यसभा सीट को लेकर जबरदस्त दबाव है। कई नेता खुद को मजबूत दावेदार मान रहे हैं, जिससे संगठन के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि झामुमो अपनी पसंद के उम्मीदवारों की घोषणा करता है और कांग्रेस को अपेक्षित महत्व नहीं मिलता है, तो पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ सकता है। यहां तक कि क्रॉस वोटिंग और अंदरूनी नाराजगी की आशंकाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
वहीं चार विधायकों वाली राजद फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति पर चलती नजर आ रही है। पार्टी नेतृत्व अंतिम फैसले का इंतजार कर रहा है। हालांकि सत्ता गठबंधन का हिस्सा होने के कारण राजद के लिए अंततः झामुमो समर्थित उम्मीदवारों का समर्थन करना लगभग तय माना जा रहा है। वाम दल भी झामुमो के साथ खड़े हैं।
संख्याबल के लिहाज से झामुमो दोनों सीटों पर मजबूत स्थिति में है। दूसरी ओर भाजपा भी अपने समीकरण साधने में जुटी है। ऐसे में मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और झामुमो समर्थित उम्मीदवारों के बीच ही रहने की संभावना जताई जा रही है। झामुमो खेमे को भरोसा है कि गठबंधन की वर्तमान परिस्थितियों में कांग्रेस के पास दबाव बनाने के सीमित विकल्प हैं, क्योंकि राजनीतिक समीकरणों में भाजपा एक वैकल्पिक शक्ति के रूप में मौजूद है।

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