झारखंड सरकार खून देने में नहीं, खून चूसने में लगी है” :राफ़िया नाज़

रांची :भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता राफ़िया नाज़ ने झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और राज्य सरकार जनता की जिंदगी के साथ खुला खिलवाड़ कर रही है।

उन्होंने कहा,यह सरकार खून देने वाली नहीं, खून चूसने वाली बन चुकी है। जिस राज्य में थैलेसीमिया के मासूम बच्चों को एचआईवी संक्रमित (HIV+) खून चढ़ाया जाए और बिना सही मिलान के मिसमैच ब्लड देकर मरीजों की जान ली जाए, वह व्यवस्था नहीं बल्कि मौत का तंत्र बन चुका है।

राफ़िया नाज़ ने सरकार की नीयत और नाकामी पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर भारतीय जनता पार्टी लगातार रक्तदान शिविर लगाकर मानवता की सेवा कर रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार के पास न तो खून के सुरक्षित संग्रहण की तकनीक है और न ही आधुनिक भंडारण की व्यवस्था।

हैरानी की बात है कि सरकार रक्तदान को लेकर कोई जागरूकता अभियान तक नहीं चला रही……यह सीधी लापरवाही नहीं, बल्कि संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा,स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी केवल बयानबाजी में व्यस्त हैं, जबकि ज़मीनी हकीकत सुधारने की कोई इच्छाशक्ति नहीं दिखती। पूरा सिस्टम लापरवाही, अराजकता का प्रतीक बन चुका है।

उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह निष्क्रिय हो गया है……ब्लड बैंक की गाड़ियां धूल फांक रही हैं और विभाग के कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।उन्होंने कहा जामताड़ा, दुमका, देवघर, साहिबगंज, पाकुड़, गिरिडीह और पलामू जैसे जिलों में ब्लड बैंक या तो खाली हैं या बेहद कम स्टॉक पर चल रहे हैं।

जहां रोजाना 15–25 यूनिट रक्त की जरूरत है, वहां आधा भी उपलब्ध नहीं…..यह सरकार की घोर विफलता का जीता-जागता प्रमाण है।राफिया ने कहा,प्रसव के दौरान खून की कमी से गर्भवती महिलाओं की मौत और नवजात बच्चों का खतरे में पड़ना अत्यंत दर्दनाक है। गंभीर मरीज खून के अभाव में तड़प रहे हैं, और गलत रक्त चढ़ाने से लोगों की जान जा रही है ………यह केवल लापरवाही नहीं, यह सरकार की अमानवीयता और असंवेदनशीलता का प्रमाण है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में खून की भारी कमी के बीच ब्लैक मार्केटिंग (Black Marketing )का गंदा खेल खुलेआम चल रहा है।

उन्होंने कहा गरीबों की मजबूरी को कमाई का जरिया बना दिया गया है। सरकार अगर चाहे तो इस पर तुरंत रोक लगाकर दोषियों को सख्त सजा दे सकती है, लेकिन इच्छाशक्ति की कमी साफ दिखती है।

आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में हर महीने 10,000–12,000 यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है, जबकि उपलब्धता कई बार 6,000–7,000 यूनिट तक ही सीमित रहती है — यानी 30–40% की भारी कमी।यह कमी ही लोगों की जान ले रही है और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।

राफ़िया नाज़ ने कहा,यह केवल विफलता नहीं, बल्कि जनजीवन के साथ सीधा अपराध है। झारखंड सरकार के दावे खोखले हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त करने की ज़रूरत है साथ ही नियमित जागरूकता अभियान चलाए जाएं और लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाए ,ताकि किसी भी नागरिक की मौत खून के अभाव में न हो।…..

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