मनसा देवी मंदिर में श्रद्धा का सैलाब: डलिया चढ़ा, मन्नत मांगी… अब देर रात बिहुला-लखेंद्र की अनूठी शादी का इंतज़ार!

भागलपुर। आज अंगनगरी भागलपुर में आस्था की नदियां बह रही हैं, और केंद्र में हैं – लोकमाता मनसा देवी। सुबह की पहली किरण के साथ ही चंपानगर का ऐतिहासिक मनसा मंदिर श्रद्धालुओं से भर गया। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, वैसे-वैसे भीड़ उमड़ती गई — कोई डलिया में चढ़ावा लिए आया, कोई प्रसाद में पान और दूब समेटे… सबकी जुबां पर बस एक ही नाम – मनसा माई।मन्नतों का मेला, श्रद्धा का सागरलोकविश्वास की डोर से बंधे हज़ारों श्रद्धालु बिहार-झारखंड से उमड़े हैं। मान्यता है – जो भी सच्चे मन से माई से मन्नत मांगता है, वो खाली नहीं लौटता। डलिया चढ़ाकर लोग अपनी पीड़ा माई के चरणों में रख रहे हैं। सुबह पांच बजे मंदिर के पंडित संतोष झा ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा की शुरुआत की।सुरक्षा चाक-चौबंद, निगरानी हाई-टे श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस बल हर चौराहे पर तैनात है। मंदिर के भीतर और बाहर 12 से अधिक CCTV कैमरे नजर रख रहे हैं। मंदिर समिति भी हर पल सजग है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए विशेष सुविधा व्यवस्था की गई है।

रात में पुनर्जीवित होगी लोककथा: बिहुला-लखेंद्र का विवाह

श्रद्धा का चरम दृश्य तो अब देर रात देखने को मिलेगा, जब बिहुला-लखेंद्र की पौराणिक विवाह लीला मंचित होगी। धर्म, प्रेम और त्याग की यह गाथा आज भी लोगों की आंखें नम कर देती है। विवाह के उपरांत आधी रात को सिंह नक्षत्र में नाग दंश की अनोखी रस्म अदा की जाएगी — जब लखेंद्र नाग द्वारा डंसा जाएगा। यह दृश्य इतना भावुक और आध्यात्मिक होता है कि लोग घंटों जमे रहते हैं। महिलाएं विशेष रूप से इस लीला को देखने के लिए समूहों में मंदिर पहुंचती हैं।

चांदो सौदागर की परंपरा से जुड़ा है मंदिर

इतिहास की गलियों में झांके तो यह मंदिर चांदो सौदागर और सती बिहुला की कथाओं से जुड़ा है। मंदिर में स्थापित प्राचीन शिवलिंग को उन्हीं की पूजा का प्रतीक माना जाता है, जो आज भी मंदिर के उत्तरी कोने में भक्तों को दर्शन देता है।

श्रद्धा का यह पर्व… बस एक संदेश लेकर आता है: “जहां आस्था है, वहीं समाधान है।
जहां माई मनसा हैं, वहां मन्नत अधूरी नहीं रहती।”

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