17 जनवरी शनिवार का राशिफल एवं पंचांग,पढ़िए आज आपके भाग्य में क्या है
मेष राशि : मनोरंजन में बाहर की गतिविधियों को शामिल करें। आर्थिक लाभ होगा। प्रेम संबंधों में सावधानी रखें। व्यक्तित्व में निखार आएगा। जीवन में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। नए प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका मिलेगा।
उपाय: लाल या भूरे रंग की गाय को रोटी में गुड़ रखकर खिलाएं।
वृषभ राशि*: आशावादी बनें। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। प्रेम संबंधों में मील होगा। जीवन में स्थिरता आएगी। परिवार के साथ समय बिताएं। नए संबंध बनेंगे।
*उपाय:* छोटी कन्याओं में खीर बाँटें।
मिथुन राशि*: व्यक्तित्व में निखार आएगा। आर्थिक लाभ होगा। प्रेम संबंधों में सावधानी रखें। जीवन में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। नए दोस्त बनेंगे। शिक्षा में सफलता मिलेगी।
*उपाय:* पारिवारिक जीवन की सुख-शांति हेतु मंदिर एवं धार्मिक स्थलों पर शुद्ध घी व कपूर का दान करें।
कर्क राशि*: व्यक्तित्व में निखार आएगा। आर्थिक लाभ होगा। प्रेम संबंधों में मील होगा। जीवन में स्थिरता आएगी। परिवार के साथ समय बिताएं। भावनात्मक संबंध मजबूत होंगे।
*उपाय:* अपने प्रेमी/प्रेमिका को समय-समय पर सफेद वस्तुएं गिफ्ट में देते रहें।
सिंह राशि*: व्यक्तित्व में निखार आएगा। आर्थिक लाभ होगा। प्रेम संबंधों में सावधानी रखें। जीवन में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। नए दोस्त बनेंगे। नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी।
*उपाय:* गुरु अथवा पिता को गुलाबी रंग के वस्त्र भेंट में दें।
कन्या राशि*: व्यक्तित्व में निखार आएगा। आर्थिक लाभ होगा। प्रेम संबंधों में मील होगा। जीवन में स्थिरता आएगी। परिवार के साथ समय बिताएं। स्वास्थ्य में सुधार होगा।
*उपाय:* गौ-दान करें, यदि संभव न हो तो गौ खरीदने के मूल्य के बराबर दान गौ आश्रम में करें।
तुला राशि*: आशावादी बनें। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। प्रेम संबंधों में मील होगा। जीवन में स्थिरता आएगी। परिवार के साथ समय बिताएं। सामाजिक संबंध मजबूत होंगे।
*उपाय:* एक दूध की कटोरी किसी कुत्ते को पिलाएं।
वृश्चिक राशि*: आशावादी बनें। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। प्रेम संबंधों में मील होगा। जीवन में स्थिरता आएगी। परिवार के साथ समय बिताएं। भावनात्मक संबंध मजबूत होंगे।
*उपाय:* आज आपको अपने प्रिय के साथ समय बिताने के पर्याप्त मौके नहीं मिलेंगे। दही में चीनी डालकर सेवन करें।
धनु राशि*: आशावादी बनें। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। प्रेम संबंधों में मील होगा। जीवन में स्थिरता आएगी। परिवार के साथ समय बिताएं। नए अवसर मिलेंगे।
*उपाय:* मिटटी का खाली घड़ा ढक्कन सहित बहते जल में प्रवाहित करें।
मकर राशि: व्यक्तित्व में निखार आएगा। आर्थिक लाभ होगा। प्रेम संबंधों में सावधानी रखें। जीवन में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। नए दोस्त बनेंगे। नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी। उपाय :लक्ष्मी जी की चालीसा व आरती पढ़ें।
कुम्भ राशि*: आशावादी बनें। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। प्रेम संबंधों में मील होगा। जीवन में स्थिरता आएगी। परिवार के साथ समय बिताएं। सामाजिक संबंध मजबूत होंगे।
*उपाय:* सूर्योदय के समय प्राणायाम करें।
मीन राशि: आशावादी बनें। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। प्रेम संबंधों में मील होगा। जीवन में स्थिरता आएगी। परिवार के साथ समय बिताएं। भावनात्मक संबंध मजबूत होंगे। उपाय: केसर की पुड़िया पीले रंग के कपड़े में बांधकर अपने पास रखें।
आज जिन भाई-बहनों का जन्मदिन या शादी की सालगिरह है उन सभी भाई-बहनों को हार्दिक शुभकामनाएँ
🌞 ll~ वैदिक पंचांग ~ll 🌞
🌤️ दिनांक – 17 जनवरी 2026
🌤️ दिन – शनिवार
🌤️ विक्रम संवत 2082
🌤️ शक संवत -1947
🌤️ अयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – शिशिर ॠतु
🌤️ मास – माघ
🌤️ पक्ष – कृष्ण
🌤️ तिथि – चतुर्दशी रात्रि 12:03 तक तत्पश्चात अमावस्या
🌤️ नक्षत्र – मूल सुबह 08:12 तक पूर्वाषाढा
🌤️ योग – व्याघात रात्रि 09:18 तक तत्पश्चात हर्षण
🌤️ राहुकाल – सुबह 10:04 से सुबह 11:26 तक
🌤️ सूर्योदय – 06:19
🌤️ सूर्यास्त – 05:17
👉 दिशाशूल – पूर्व दिशा मे
🚩 *व्रत पर्व विवरण-
💥 *विशेष – चतुर्दशी व अमावस्या एवं व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
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🌷 माघ-मौनी अमावस्या 🌷
➡ 18 जनवरी 2026 रविवार को माघ-मौनी अमावस्या है ।
🙏🏻 माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। इस नामकरण के लिए दो मान्यताएं हैं ।
🙏🏻 इस दिन मौन रहना चाहिए। मुनि शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति हुई है। इसलिए इस व्रत को मौन धारण करके समापन करने वाले को मुनि पद की प्राप्ति होती है। इस दिन मौन रहकर प्रयाग संगम अथवा पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए।
🙏🏻 ऐसा माना जाता है इस दिन ब्रह्मा जी ने स्वयंभुव मनु को उत्पन्न कर सृष्टि का निर्माण कार्य आरम्भ किया था इसलिए भी इस अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है।
🙏🏻 ‘पद्म पुराण’ के अनुसार माघ मास के कृष्णपक्ष की अमावस्या को सूर्योदय से पहले जो तिल और जल से पितरों का तर्पण करता है, वह स्वर्ग में अक्षय सुख भोगता है। जो उक्त तिथि को तिल की गौ बनाकर उसे सब सामग्रियों सहित दान करता है, वह सात जन्म के पापों से मुक्त हो स्वर्गलोक में अक्षय सुख का भागी होता है। ब्राह्मण को भोजन के योग्य अन्न देने से भी अक्षय स्वर्ग की प्राप्ति होती है। जो उत्तम ब्राह्मण को अनाज, वस्त्र, घर आदि दान करता है, उसे लक्ष्मी कभी नहीं छोड़ती।
🙏🏻 इस दिन पितृ पूजा, श्राद्ध, तर्पण, पिण्ड दान, नारायणी आदि कर सकते है। वैसे तो प्रत्येक अमावस्या पितृ कर्म के लिए विशेष होती है परंतु युगादि तिथि तथा मकरस्थ रवि होने के कारण मौनी अमावस्या का महत्व कहीं ज्यादा है। अगर आप पितृदोष से पीड़ित हैं अथवा आपको लगता है की आपके पिता, माता अथवा गुरु के कुल में किसी को अच्छी गति प्राप्त नहीं हुई है तो आज तर्पण (विशेषतः गंगा किनारे) जरूर करें।
🙏🏻 अगर आप सौभाग्यशाली हैं और इस दिन गंगा स्नान के लिए जा रहे हैं तो तर्पण के अलावा भी बहुत कृत्य हैं। स्कंदपुराण में भगवान शिव का कथन है ।
🙏🏻 जो पितरों के उद्देश्य से भक्तिपूर्वक गुड़, घी और तिल के साथ मधुयुक्त खीर गंगा में डालते हैं, उसके पितर सौ वर्षों तक तृप्त बने रहते हैं और वे संतुष्ट होकर अपनी संतानों को नाना प्रकार की मनोवाञ्छित वस्तुएं प्रदान करते हैं।
🙏🏻 जो पितरों के उद्देश्य से गंगाजल के द्वारा शिवलिंग को स्नान कराते हैं, उनके पितर यदि भारी नरक में पड़े हों तो भी तृप्त हो जाते हैं।
🙏🏻 जो एक बार भी ताँबे के पात्र में रखे हुए अष्टद्रव्ययुक्त (जल, दूध, कुश का अग्रभाग, घी, मधु, गाय का दही, लाल कनेर तथा लाल चंदन) गंगाजल से भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं, वे अपने पितरों के साथ सूर्यलोक में जाकर प्रतिष्ठित होते हैं।
🙏🏻 जो गंगा के तट पर एक बार भी पिण्डदान करता है, वह तिलमिश्रित जल के द्वारा अपने पितरों का भवसागर से उद्धार कर देता है।
🙏🏻 पिता/माता/गुरु/भाई/मित्र/रिश्तेदार किसी के भी कुल में कोई किसी भी तरह, किसी भी अवस्था में मरा हो (चाहे अग्नि से या विष से या आत्मदाह अथवा अन्य प्रकार से मृत्यु) आज सब पितरों का उद्धार संभव है।
🙏🏻 माघ कृष्ण पक्ष की अमावस्या युगादि तिथि है। अर्थात इस तिथि को चार युगों में से एक युग का आरम्भ हुआ था। स्कंदपुराण के अनुसार “माघे पञ्चदशी कृष्णा द्वापरादिः स्मृता बुधैः” द्वापर की आदि तिथि हैं जबकि कुछ विद्वान इसको कलियुग की प्रारम्भ तिथि मानते हैं। युगादि तिथियाँ बहुत ही शुभ होती हैं, इस दिन किया गया जप, तप, ध्यान, स्नान, दान, यज्ञ, हवन कई गुना फल देता है l प्रत्येक युग में सौ वर्षों तक दान करने से जो फल होता है, वह युगादि-काल में एक दिन के दान से प्राप्त हो जाता है ।
🙏🏻 इस दिन साधु, महात्मा तथा के सेवन के लिए अग्नि प्रज्वलित करनी चाहिए तथा उन्हें रजाई, कम्बल आदि जाड़े के वस्त्र देने चाहिए। इस दिन गुड़ में काले तिल मिलाकर मोदक बनाने चाहिए तथा उन्हें लाल वस्त्र में बांधकर ब्राह्मणों को देना श्रेयस्कर है। इसी पुण्य पर्व पर विभिन्न प्रकार के नैवेद्य मिष्टान्नादि षट्रस व्यंजनों से ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें द्रव्य दक्षिणादि से संतुष्ट कर प्रणामादि कर सादर विदा करना चाहिए।
🙏🏻 गौशाला में गायों के निमित्त हरे चारे, खल, चोकर, भूसी, गुड़ आदि पदार्थों का दान देना चाहिए तथा गौ की चरण रज को मस्तक पर धारण कर उसे साष्टांग प्रणाम करना चाहिए।
🙏🏻 माघी अमावस्या को प्रात: स्नान के बाद ब्रह्मदेव और गायत्री का पूजन करें। गाय, स्वर्ण, छाता, वस्त्र, पलंग, दर्पण आदि का मंत्रोपचार के साथ ब्राह्मण को दान करें। पवित्र भाव से ब्राह्मण एवं परिजनों के साथ भोजन करें। इस दिन पीपल में आघ्र्य देकर परिक्रमा करें और दीप दान दें। इस दिन जिनके लिए व्रत करना संभव नहीं हो वह मीठा भोजन करें।
🙏🏻 मौनी अमावस्या के दिन भूखे प्राणियों को भोजन कराने का भी विशेष महत्व है। इस दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं। गोलियां बनाते समय भगवान का नाम लेते रहें। इसके बाद समीप स्थित किसी तालाब या नदी में जाकर यह आटे की गोलियां मछलियों को खिला दें। इस उपाय से आपके जीवन की अनेक परेशानियों का अंत हो सकता है। अमावस्या के दिन चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से आपके पाप कर्मों का क्षय होगा और पुण्य कर्म उदय होंगे। यही पुण्य कर्म आपकी मनोकामना पूर्ति में सहायक होंगे।
🌷 दशतीर्थसहस्राणि तिस्रः कोटयस्तथा पराः॥ समागच्छन्ति मध्यां तु प्रयागे भरतर्षभ। माघमासं प्रयागे तु नियतः संशितव्रतः॥ स्नात्वा तु भरतश्रेष्ठ निर्मलः स्वर्गमाप्नुयात्। (महाभारत, अनुशासन पर्व 25 । 36 -38)
➡ अर्थात माघ मास की अमावस्या को प्रयाग राज में तीन करोड़ दस हजार अन्य तीर्थों का समागम होता है। जो नियमपूर्वक उत्तम व्रत का पालन करते हुए माघ मास में प्रयाग में स्नान करता है, वह सब पापों से मुक्त होकर स्वर्ग में जाता है।
~ पंचांग ~
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