गंगा लील रही जिंदगियां, सरकार खामोश – अब वोट नहीं, सड़कों पर उतर करेंगे शंखनाद

प्रदीप विद्रोही,भागलपुर। गंगा की कटती धार अब सिर्फ मिट्टी नहीं बहा रही, बल्कि गांवों का वजूद निगल रही है। पिछले कुछ वर्षों से भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड में बसे ममलखा और आसपास के गांवों में हर लहर के साथ लोगों की उम्मीदें भी बहती जा रही हैं। अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग सरकार को चेतावनी दे रहे हैं – अगर हमारी जमीन नहीं बची, तो तुम्हारी कुर्सी भी नहीं बचेगी।

अस्तित्व बचाओ आंदोलन संघर्ष समिति’ ने गुरुवार की रात शंकरपुर पंचायत में जो बैठक की, वह सिर्फ एक जुटान नहीं, बल्कि एक चेतावनी थी – वोट नहीं, अब आंदोलन होगा। बैठक की अध्यक्षता कर रहे पंचायत सरपंच रतन मंडल ने दो टूक कहा – सरकार सिर्फ वादे करती है, लेकिन हमारा गांव हर साल गंगा में समा रहा है। अब हम और इंतजार नहीं करेंगे।

दीपक कुमार, जो आंदोलन समिति के अध्यक्ष हैं, ने कहा – हर साल हमारा गांव छोटा होता जा रहा है। सैकड़ों लोग बेघर हो चुके हैं। कुछ तो नए घर में गृह प्रवेश भी नहीं कर पाए। गंगा ने सब लील लिया। अब अगर रिंग बांध का काम नहीं शुरू हुआ, तो 2025 के विधानसभा चुनाव में वोट का बहिष्कार होगा।

बैठक में मौजूद ग्रामीणों की आंखों में गुस्सा भी था और डर भी – गुस्सा सरकार की बेरुखी पर, और डर अपने वजूद को खोने का। हर एक ने एक स्वर में कहा, अब बहुत हुआ। अस्तित्व बचाओ आंदोलन’ सिर्फ नारा नहीं है, यह हमारे जीने का सवाल है।

18 सितंबर को निर्णायक मार्च

बैठक में यह भी तय हुआ कि 18 सितंबर को शंकरपुर से सबौर प्रखंड कार्यालय तक पैदल मार्च किया जाएगा। यह मार्च सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक चेतावनी होगी। सरकार जागो, वरना गांववाले सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ेंगे।

सरपंच रतन मंडल ने प्रशासन को आखिरी चेतावनी देते हुए कहा, कागज़ी आश्वासन अब नहीं चलेंगे। अगर हमें मजबूर किया गया, तो हम चुनाव का बहिष्कार करेंगे और इस आंदोलन को प्रदेश स्तर तक ले जाएंगे।

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