कहलगांव में गंगा खतरे के निशान से 9 सेमी ऊपर, स्थिति पर लगातर रखी जा रही नज़र
प्रदीप विद्रोही,भागलपुर। जिले में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे भागलपुर, कहलगांव और सुल्तानगंज के कई क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। सुल्तानगंज में गंगा खतरे के निशान को पार कर चुकी है और जलस्तर में और वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। भागलपुर और कहलगांव में भी हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। अनुमान है कि सोमवार तक भागलपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच सकता है।
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, कहलगांव में गंगा का जलस्तर सोमवार को 31.18 मीटर दर्ज किया गया, जो कि खतरे के निशान 31.09 मीटर से 9 सेंटीमीटर ऊपर है। वहीं मुंगेर, भागलपुर और हाथीदह में भी जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है।
निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात
कहलगांव और एकचारी के समीप गंगा का पानी तेजी से फैल रहा है। कई निचले इलाकों में पानी भर चुका है। नवगछिया स्थित दियारा क्षेत्र से लोग अपने मवेशियों और सामान के साथ नाव के जरिए सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
प्रशासन सतर्क, एसडीआरएफ तैनात
प्रशासन ने हालात को देखते हुए अलर्ट जारी कर दिया है। सुल्तानगंज के आरएस कॉलेज घाट पर एसडीआरएफ की टीम तैनात की गई है। कांवरियों और स्थानीय लोगों से नदी किनारे न जाने की अपील की गई है। घाटों पर माइकिंग कर सुरक्षा निर्देश दिए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग गंगा पार कर रहे हैं, जिनकी गतिविधियों पर प्रशासन निगरानी बनाए हुए है।
सदर एसडीओ विकास कुमार ने बताया कि गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है और प्रशासन स्थिति पर सतर्क निगाह बनाए हुए है। आपदा प्रबंधन विभाग ने भी बाढ़ से निपटने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
तटबंध मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर
नवगछिया के इस्माइलपुर में गंगा के स्पर संख्या-9 पर क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत युद्ध स्तर पर की जा रही है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की निगरानी में ठेकेदारों द्वारा कार्य जारी है। अब तक 7 से 8 हजार से अधिक बालू भरी बोरियां डाली जा चुकी हैं। अधिकारियों ने बताया कि जलदबाव अधिक होने से कुछ कठिनाइयाँ आ रही हैं, लेकिन जल्द ही तटबंध को पूरी तरह ठीक कर लिया जाएगा।
कटाव से उपजाऊ जमीन समा रही गंगा में
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अब पीरपैंती के रानी दियारा, टपुआ दियारा और एकचारी दियारा में भी दिखने लगा है। खेतों में पानी भरने लगा है और फसलें डूबने लगी हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कटाव रोकने के लिए पोल और बालू भरी बोरियां लगाई जा रही हैं।
चायचक, तोफिल और अठावन दियारा क्षेत्रों में कटाव की स्थिति गंभीर हो गई है। तोफिल गांव से लेकर बाबा स्थान और अठावन गांव तक रुक-रुककर कटाव जारी है। बीरबन्ना पंचायत की मुखिया ललिता देवी ने बताया कि गंगा में बड़ी मात्रा में उपजाऊ भूमि समा रही है। सबौर प्रखंड के चायचक, काठाघाट और धनकड़ा क्षेत्रों में मिर्च और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है।
जल संसाधन विभाग के पदाधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि कहलगांव में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
बाढ़ पूर्व सभी आवश्यक प्रबंध पूरे,
एसडीआरएफ की 12 टीमें तैनात :
इधर जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह पाया गया कि जिले में नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) श्री कुंदन कुमार ने जानकारी दी कि बाढ़ पूर्व सभी आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। जिले में एसडीआरएफ की 12 टीमें तैनात हैं। गोताखोरों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। बाढ़ संभावित अंचलों, पंचायतों और गांवों की सूची प्रशासन के पास उपलब्ध है।
जिले में 22 हजार पॉलिथीन शीट, जीवन रक्षक दवाएं और पशु चारे की पर्याप्त व्यवस्था कर दी गई है। संबंधित अंचलों द्वारा 171 शरण स्थलों की पहचान की गई है, जबकि 166 सामुदायिक किचनों के संचालन हेतु विद्यालय चिन्हित किए गए हैं, जहाँ रसोइयों की भी व्यवस्था की जा चुकी है। इसके अलावा, जिले में 128 निजी नावों की पहचान की गई है, जिनकी सूची सभी अंचलों को उपलब्ध करा दी गई है।जल संसाधन विभाग द्वारा तटबंधों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। इस्माइलपुर के बिंद टोली स्थित स्पर संख्या 7 और 8 के बीच 242 मीटर क्षेत्र में 22 मीटर गहराई तक स्टील शीट की दीवार खड़ी की गई है, ताकि तटबंध को सुरक्षित रखा जा सके। जिलाधिकारी ने नवगछिया अंचल के कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिया कि वे तटबंध के संवेदनशील एवं खतरनाक बिंदुओं की पहचान कर आवश्यक जानकारी विभाग को शीघ्र उपलब्ध कराएं।



