फिल्म ‘महुआ घटवारिन’ के पटकथा लेखक शीतांशुअरुण के नवीनतम उपन्यास पर विस्तृत चर्चा

भागलपुर। शहर स्थित बरारी में रविवार को अंग संवाद की पहली बैठक आयोजित हुई। इसमें फिल्म ‘महुआ घटवारिन’ के पटकथा लेखक शीतांशु अरुण के नवीनतम उपन्यास के शिल्प पर विस्तृत चर्चा हुई। कलम के जादूगर शीतांशु अरुण की लेखनी के कायल अंग के दर्जनों लेखक व पाठक हैं। अपनी लेखनी में अरुण सहज भाषा व शब्दों के जरिए पाठकों के दिल में उतरने में माहिर माने जाते हैं। फिल्म महुआ घटवारिन की पटकथा दमदार साबित हुआ था। मजबूत पटकथा के कारण ही यह फिल्म चर्चा में रही थी।
चर्चा गोष्ठी में शहर के चर्चित कथाकार रंजन कुमार की उपस्थिति में पटकथाकार शीतांशु अरुण ने अपने अप्रकाशित हिन्दी उपन्यास के कुछ अंशों का पाठ किया। वैसे इस चर्चित उपन्यास का अभी नामकरण नहीं हुआ है। उपस्थित साहित्यकारों ने उपन्यास के शिल्प, देशकाल, पात्र-चित्रन और भाषा विन्यास पर गंभीरतापूर्वक अपने-अपने विचार रखे और सुझाव दिए।
डॉ. अमरेंद्र ने उपन्यास में पात्र की जीवंतता को जरूरी बताया और कहा कि यदि पात्र जीवंत हो तो उद्देश्य इतना महत्वपूर्ण नहीं रहता। उन्होंने यह भी कहा कि लेखक स्वयं सारी बातें पात्र के लिए ना कहें। वरिष्ठ कथाकार रंजन ने कहा कि औत्सुक्य एक ऐसा तत्व है जिसके बिना उपन्यास अपनी लोकप्रियता खो बैठता है। आज हिंदी में उपन्यास की पठनीयता जो कम हुई है।उसके पीछे यही कारण है। क्या कारण है कि हिंदी के प्रेमचंद और बांग्ला साहित्य के शरद बाबू आज भी लोकप्रिय है। नालंदा बीएड कॉलेज के प्राध्यापक डॉ अंजनी कुमार सुमन ने कहा कि उपन्यास में देश काल और पात्र का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। इसके अलावा पात्र के आसपास के दृश्यों को सजाने से उपन्यास का सौंदर्य बढ़ता है। सुसंभाव्य पत्रिका के संपादक दयानंद जायसवाल ने उपन्यास की कथावस्तु को और अधिक सशक्त बनाने का सुझाव दिया। नाटककार सत्यनारायण मंडल ने पात्रों को और अधिक स्थापित करने का सुझाव दिया ताकि वे पाठकों के मन में आरंभ से ही स्थान बना लें। वरिष्ठ कवि राजकुमार और मुरारी मिश्र ने भी उपन्यास की भाषा और शिल्प की भूरि-भूरि प्रशंसा की। साहित्यकारों ने आशा व्यक्त की कि जल्द ही पाठकों को शीतांशु अरुण लिखित एक अच्छा उपन्यास पढ़ने को मिलेगा। गोष्ठी में शिल्प की विषद चर्चा कर सभी तृप्त हुए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *