झारखंड की आदिवासी, दलित और गरीब बच्चों को कोचिंग माफिया बना रहे शिकार,विधानसभा मानसून सत्र में मुद्दा उठाने की मांग

रांची : झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन  परीक्षा 2025 के नतीजों में एक बार फिर कोचिंग संस्थानों के दावों और आधिकारिक आंकड़ों में भारी अंतर सामने आया है। जेपीएससी ने जहां केवल 342 छात्रों की सफलता की घोषणा की है, वहीं राज्य के विभिन्न कोचिंग संस्थान कहीं अधिक छात्रों के चयन का दावा कर रहे हैं।

इस मामले पर प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक दूबे ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में कोचिंग माफिया भोले-भाले आदिवासी, दलित और गरीब छात्रों को गुमराह कर रहे हैं।

संस्थान झूठे आंकड़े पेश कर अभिभावकों को भ्रमित करते हैं और छात्रों को मानसिक दबाव में डालते हैं। मैं सरकार से मांग करता हूं कि मानसून सत्र में इसे प्रमुखता से उठाया जाए। सरकार को तत्काल इस पर सख्त नियमावली बनानी होगी।

उन्होंने गोल कोचिंग  जैसे संस्थानों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह भी ऐसे ही झूठे रिजल्ट का प्रचार करता है और छात्रों पर अनावश्यक मानसिक दबाव डालता है। उन्होंने कहा कि गोल  सहित कई संस्थान अचानक रात 2 बजे या किसी भी समय सरप्राइज़ टेस्ट लेते हैं, जिससे छात्र तनाव और नींद की कमी से जूझते हैं। इसके अलावा, अत्यधिक असाइनमेंट और टेस्ट का बोझ बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। पिछले वर्ष फिटजी यहां आई और बच्चों से लाखों रुपये वसूलने के बाद गायब हो गई। जो संस्था खुद में ‘फिट’ नहीं है, वह बच्चों को क्या पढ़ाएगी? और फिर दुबारा से फिटजी ठगी कर रहा है,यह छात्रों और उनके माता-पिता के साथ खुली ठगी है।”

महासचिव ने आरोप लगाया कि कई कोचिंग संस्थान नॉन-स्कूलिंग की प्रथा अपनाते हैं, जिससे बच्चे नियमित स्कूली शिक्षा से वंचित हो जाते हैं और पूरा समय कोचिंग के दबाव में गुजारते हैं।

आलोक दूबे ने मांग की कि कोचिंग संस्थानों के लिए बनने वाली सख्त नियमावली में निम्न प्रावधान शामिल हों, जैस  अधिकतम फीस की सीमा तय हो,सिलेबस पूरा करने की स्पष्ट समयसीमा,अत्यधिक असाइनमेंट और टेस्ट पर रोक,रात में या अजीब समय पर सरप्राइज़ टेस्ट पूरी तरह प्रतिबंधित हों,नॉन-स्कूलिंग प्रथा पर पूर्ण रोक,झूठे आंकड़ों और भ्रामक विज्ञापनों पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान और सशक्त कानून की मांग बनाने की जरूरत है।

महासचिव ने कहा कि यह समस्या केवल एक-दो संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई कोचिंग संस्थानों के आंकड़े संदिग्ध हैं। इसलिए एक सशक्त कानून बने, जो छात्रों के हितों की रक्षा करे और कोचिंग माफिया की मनमानी पर रोक लगाए।

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