झारखंड पवेलियन में उमड़ी भीड़, पतरातू वैली और खनन पर्यटन बने मुख्य आकर्षण

नई दिल्ली : भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला में फोकस स्टेट के रूप में शामिल झारखंड पवेलियन इस वर्ष अपने अनूठे माइनिंग टूरिज्म मॉडल के साथ सुर्खियों में है। शनिवार को पूरे देश से आए आगंतुकों ने झारखंड पवेलियन में प्रदर्शित माइनिंग टूरिज्म, और धार्मिक पर्यटन की समग्र प्रस्तुति को एक नए नज़रिए से देखा और झारखंड पर्यटन को नज़दीक से देखना चाहा । राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे बुनियादी ढांचा विकास, सांस्कृतिक संरक्षण, पर्यटन प्रमोशन और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से झारखंड देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में तेजी से उभर रहा है।

माइनिंग टूरिज्म की इस पहल के तहत पर्यटक प्रशिक्षित गाइडों के साथ सक्रिय कोयला खदानों का भ्रमण कर सकते हैं, खनन प्रक्रियाओं, अत्याधुनिक मशीनों के संचालन और सुरक्षित खनन तकनीकों को नजदीक से समझ सकते हैं और  साथ ही  ऊर्जा उत्पादन और देश की अर्थव्यवस्था में झारखंड की अहम भूमिका का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

पवेलियन में स्थापित वर्चुअल रियलिटी अनुभव इस कहानी को और मजबूत करते हैं। पर्यटन विभाग द्वारा पतरातू वैली, नेतरहाट, सारंडा फॉरेस्ट, बेतला नेशनल पार्क, चांडिल डैम और पारसनाथ जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों का वर्चुअल रियलिटी प्रस्तुतीकरण आगंतुकों को एक अनुभव प्रदान कर रहा है

पवेलियन में झारखंड की आध्यात्मिक धरोहर भी विशेष रूप से प्रदर्शित की गई है। जिसमे बैद्यनाथ धाम (देवघर), शक्तिपीठ हृदयपीठ, जहां माता सती का हृदय गिरा था, और श्री बंशीधर मंदिर जिसमे भगवान श्रीकृष्ण की 32 मन यानी 1280 किलोग्राम शुद्ध सोने से निर्मित प्रतिमा स्थापित है

पतरातू वैली की भव्यता दर्शको को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है। हरी वादियां, विशाल झील, बांध और पतरातू झील पर बोटिंग जैसे अनुभव झारखंड को उभरते हुए प्राकृतिक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहे हैं। यहां  झारखण्ड सरकार द्वारा विकसित व्यू प्वाइंट, कैफेटेरिया और मनोरंजन सुविधाएं पर्यटन को और अधिक सुलभ व आकर्षक बना रही हैं।

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