मिशनरी संस्थाएं आदिवासियों का धर्मान्तरण करा रही हैं: निशा भगत
रांची: झारखंड के पुनरुथान, आदिवासी अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और महिला सम्मान का संरक्षण के लिए झारखंड के कई जिलों से आये हुए युवाओं, महिलाओं और बुद्धिजीवियों का एक वृहद सामाजिक जन-जागरण कार्यक्रम राँची स्थित पिठौरिया के संजय रेसीडेंसी भवन में आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता आदिवासी नेत्री निशा भगत ने की। बैठक में प्रमुख रूप से झारखण्ड राज्य में मिशनरियों द्वारा आदिवासियों का अवैध रूप से हो रहे ईसाई धर्मान्तरण और धर्मान्तरित ईसाइयों का डिलिस्टिंग पर चर्चा किया गया। वक्ताओं ने कहा कि मिशनरी संस्थाएँ आदिवासियों का धर्मान्तरण करा रही हैं और उन्हें आदिवासी संस्कृति से दूर कर रही हैं। जिससे आदिवासियों का अस्तित्व खतरे में है। धर्मान्तरित ईसाई आदिवासियों का आरक्षण और अल्पसंख्यक समुदाय का दोहरा लाभ उठा रही हैं। यह संविधान दुवारा प्रदत्त समानता के अधिकार के विपरीत है। आदिवासी नेत्री निशा भगत ने कहा कि मिशनरी संस्थानों से लड़ने के लिए आदिवासियों को एकजुट होना पड़ेगा। वहीं खूँटी नगर पंचायत की अध्यक्ष रानी टुटी ने कहा कि आदिवासी समाज को बचाने के लिए को युवाओं को आगे आना पड़ेगा। दीपक तिग्गा ने युवाओं का मामला उठाते हुए कहा कि मौजूदा सरकार में युवा पीढ़ी बेरोजगारी और पलायन को मजबूर है। झारखण्ड में पेपर लीक आम बात हो गई है। सरकारी एग्जाम का कटऑफ मार्क्स जारी नहीं किया जाता है। जिसके कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता संदेह के घेरे पर है। लक्ष्मी बाकला ने राज्य की कानून व्यवस्था और महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार पर चिंता व्यक्त की। लक्ष्मी बाकला ने कहा कि आदिवासी समाज जमशेदपुर में प्रताड़ित की गई अल्पना महली के साथ है। अभिषेक मुण्डा ने कहा कि राज्य में स्थानीय नीति और नियोजन नीति बनाने की दिशा में राज्य सरकार पहल करे। ताकि झारखण्डियों नियुक्तियों में प्राथमिकता मिले। गुमला से आये हुए आदिवासी अगुवा और उराँव समाज के स्वशासन व्यवस्था पर कहतो के पद पर अपना जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाले महेंद्र उराँव ने कहा कि सरकार डिलिस्टिंग को लेकर जल्द 342 में संशोधन करे और आगामी परिशिमन में आदिवासी हितों को ध्यान में रखते हुए परिशिमन करे। आदिवासी धर्मान्तरण, डिलिस्टिंग, बांग्लादेशी घुसपैठ, लव जिहाद, लैंड जिहाद, आदिवासी अस्मिता, सरकारी एग्जामस् में कटऑफ की पारदर्शिता, युवाओं का समस्या:- रोजगार, पलायन, जल-जंगल-जमीन का संरक्षण, आदिवासियों का विस्थापन, आदिवासियों का जमीन लूट आदि विषयों पर गहन चिंतन मंथन किया गया। आदिवासी नेत्री निशा भगत ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि बहुत जल्द आदिवासी अस्मिता का संरक्षण के लिए भगवान बिरसा मुंडा की जन्मभूमि खूँटी से 60 दिनों का डिलिस्टिंग यात्रा खूँटी से शुरू की जायेगी। कार्यक्रम में रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा, पश्चिमी सिंहभूम आदि जिलों से सैकडों युवाओं, महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।


