कुड़मी एसटी डिमांड पर विवाद, शीतल ओहदार ने कहा विरोध अनुचित
गणादेश,रांची: रांची के सुमानडीह गंगा मैदान, बुंडू में शुक्रवार को कुड़मी रूढ़ीवादी पारंपरिक ग्राम व्यवस्था मंच के बैनर तले आयोजित सम्मेलन में कुड़मी एसटी (अनुसूचित जनजाति) में शामिल किए जाने की मांग पर चर्चा की गई। सम्मेलन की अध्यक्षता ग्राम प्रधान पुसवा महतो ने की, जिसमें बुंडू, तमाड़ और अड़की के मईड़ला महतो समुदाय के लोग शामिल हुए।
सम्मेलन में समाज के वरिष्ठ नेता शशिभूषण कड़वार, कुड़मी समाज के अगुआ शीतल ओहदार, प्रोफेसर शरदचंद्र महतो, वृंदावन महतो, लोहरा महतो, श्रीकांत महतो, जगदिश महतो प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। शशिभूषण कड़वार ने कहा कि कुड़मी परंपरा समृद्ध और प्राचीन है और यह समाज सशक्त आदिवासी परंपरा का प्रतीक है।
कुड़मी समाज के नेता शीतल ओहदार ने एसटी डिमांड के विरोध को अनुचित बताते हुए कहा कि कुछ लोग “हकमारी” के नाम पर झारखंडी एकता और भाईचारे को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना था कि विरोध करने वाले बाहरी ताकतों की साजिश में फंसे हैं, जो आदिवासी समाज की जमीन, जंगल और जल पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने सभी आदिवासी, कुड़मी और मूलवासियों से अपील की कि वे सरना कोड, स्थानीय नीति और रोजगार नीति के संरक्षण के लिए एकजुट हों।
ओहदार ने कहा कि कुड़मी समाज की एसटी में शामिल होने की मांग नाजायज नहीं है। यह मांग आदिवासी महापुरुषों जैसे एन ई होरो, रामदयाल मुंडा, बी पी केशरी, सिबु सोरेन, बागून सुंबराई, लक्ष्मण गिलवा, गुरुचरण नाईक और पूर्व विधायक सूर्य बेसरा द्वारा समय-समय पर की गई है। सम्मेलन का संचालन भवरंजन महतो ने किया। इसमें हजारों लोग उपस्थित थे और मंच से सभी को एकजुट होने का संदेश दिया गया।



