भागलपुर : रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग ने बढ़ाई सियासी धड़कनें, हर खेमे में मंथन तेज, सुलझ नहीं रही पहेली

भागलपुर। जिले की सात विधानसभा सीटों – भागलपुर, कहलगांव, पीरपैंती, सुल्तानगंज, नाथनगर, बिहपुर और गोपालपुर में इस बार हुई ऐतिहासिक वोटिंग ने सियासी हलकों में हड़कंप मचा दिया है। मत प्रतिशत में अचानक आए इस उफान ने एनडीए से लेकर महागठबंधन तक सभी दलों के उम्मीदवारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर यह जनसैलाब किस ओर बह गया।

मतदान के बाद की रात प्रत्याशियों के लिए मानो नींद हराम कर देने वाली रही। जिन चेहरों ने सुबह तक जीत के समीकरण बना लिए थे, वे आधी रात को फिर से आंकड़ों में उलझ गए। कई ने अपने रणनीतिकारों और डेटा एक्सपर्ट्स को बुलाकर बूथवार समीक्षा शुरू कर दी है। हर कोई यह समझने में जुटा है कि वोटिंग का यह उछाल गुस्से का इज़हार है या उम्मीद का इशारा।

सबसे ज्यादा चर्चा में रहा कहलगांव विधानसभा, जहां इस बार रिकॉर्ड 73.12 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। जो 2020 की तुलना में पूरे 11 प्रतिशत अधिक है। यहां तीनों प्रमुख प्रत्याशी अपने-अपने तरीके से इस उछाल को अपनी ओर मोड़ने की कोशिश में हैं। एनडीए खेमे का दावा है कि ‘जनता ने विकास के नाम पर वोट दिया’, जबकि महागठबंधन का कहना है कि ‘यह वोट बदलाव की आंधी का संकेत है।’

इसके विपरीत, जिला मुख्यालय भागलपुर सदर सीट पर मात्र 57.15 प्रतिशत वोटिंग हुई। यहां का कम वोट प्रतिशत दोनों प्रमुख दावेदारों के माथे पर शिकन छोड़ गया है। यह कांग्रेस का सिटिंग सीट है।  कांग्रेस यहां जीत का चौका मरने के फ़िराक़ में है। वहीं भाजपा कमल खिलाने को आकुल – व्याकुल है।सुबह से ही दोनों दलों के सोशल मीडिया वॉर रूम में ‘फर्स्ट हाफ बनाम सेकेंड हाफ वोटिंग ट्रेंड’ का विश्लेषण जारी है। समर्थक एक्स (पूर्व ट्विटर) पर डेटा साझा कर अपनी-अपनी व्याख्याएं दे रहे हैं और यही कारण है कि इस सीट पर सस्पेंस का स्तर सबसे ज्यादा है।

मतदान के पहले हाफ में पीरपैंती ने जिले में बाज़ी मारी थी, लेकिन दोपहर बाद रफ्तार धीमी पड़ी और कभी तीसरे, तो आखिर में यह सीट दूसरे स्थान पर आ गई। यह उतार-चढ़ाव राजनीतिक पर्यवेक्षकों को खल रहा है। माना जा रहा है कि पहले पहर दियारा व ग्रामीण वोटरों की सक्रियता और बाद में शहरी इलाकों की कम भागीदारी ने ग्राफ को प्रभावित तो किया लेकिन नाक बच गई।

नाथनगर (71.55 प्रतिशत) की स्थिति सबसे दिलचस्प मानी जा रही है। आरजेडी की सिटिंग सीट होने के बावजूद यहां लोजपा (रामविलास) ने अपनी उपस्थिति को मजबूती से दर्ज तो कराया है। लेकिन दावे से परहेज। मंथन बदस्तूर जारी। दोनों दलों के स्थानीय नेता दावे तो कर रहे हैं, लेकिन खुले में नहीं। हर कोई अभी ‘सावधानीपूर्वक आश्वस्त’ दिख रहा है।

सुल्तानगंज (65.65 प्रतिशत) और बिहपुर (65.58 प्रतिशत) में भी वोटिंग प्रतिशत ने पिछले चुनावों की तुलना में जबरदस्त छलांग लगाई है। यहां के प्रत्याशी इस बात पर सहमत हैं कि ‘यह सिर्फ एक लहर नहीं, बल्कि जनता के मूड बदलने का संकेत है’। पर यह मूड किसके पक्ष में गया, इसका अंदाज़ किसी को नहीं

सातों सीटों का वोटिंग बैरोमीटर

विधानसभा 2025 वोट % 2020 वोट % अंतर

कहलगांव 73.12 62.00 (+11.12)

पीरपैंती 71.70 59.02 (+12.68)

नाथनगर 71.55 59.81 (+11.74)

गोपालपुर 69.19 60.21 (+8.98)

सुल्तानगंज 65.65 52.10 (+13.55)

बिहपुर 65.58 58.05 (+7.53)

भागलपुर 57.15 48.43 (+8.72)

वोटिंग प्रतिशत का अर्थ निकालना अब सबसे बड़ी चुनौती

हर दल अपने-अपने हिसाब से “हाई टर्नआउट” की थ्योरी गढ़ रहा है। कहीं इसे युवा मतदाताओं की सक्रियता से जोड़ा जा रहा है, तो कहीं महिलाओं की बढ़ी भागीदारी से। लेकिन एक बात पर सबकी राय एक जैसी है। इस बार का वोटिंग पैटर्न परंपरागत जातीय समीकरणों से थोड़ा हटकर दिख रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इतनी ऊंची वोटिंग अक्सर बदलाव की ओर संकेत करती है। पर यह बदलाव किस दिशा में है इसका फैसला मतगणना के दिन होगा। फिलहाल, भागलपुर की सियासत में वोट प्रतिशत ही सबसे बड़ी पहेली बन चुका है।

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