होली गीत में झूमता अंग, सतरंगी उमंग से सराबोर हुआ भागलपुर
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। अंग की पावन धरती पर इस बार की होली ने उल्लास, उमंग और आत्मीयता का ऐसा रंग घोला कि पूरा शहर सतरंगी छटा में सराबोर नज़र आया। सुबह की पहली किरण के साथ ही मोहल्लों में ढोलक की थाप गूंज उठी। गलियों में अबीर-गुलाल की खुशबू तैरने लगी और घर-घर से “होली है!” की गूंज सुनाई देने लगी।
शहर के चौक-चौराहों से लेकर ग्रामीण पगडंडियों तक हर ओर रंगों की बौछार दिखाई दी। बच्चों की टोलियां पिचकारी और रंग भरे गुब्बारों के साथ मस्ती में सराबोर रहीं। युवा वर्ग डीजे पर बजते होली गीतों और पारंपरिक फगुआ की धुन पर जमकर थिरका। कहीं होली गीतों की धूम रही तो कहीं अंगिका लोकधुनों ने माहौल को और भी खास बना दिया।
ग्रामीण क्षेत्रों में होली का उत्साह कुछ अलग ही नज़र आया। कच्ची गलियों और चौपालों पर ढोलक, मंजीरा और झाल की संगत में फगुआ गाए गए। लोकगायकों की स्वर-लहरियों ने मानो पूरे वातावरण को रंग और रस से भर दिया। महिलाएं- पुरुष पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी, समूह बनाकर एक-दूसरे को अबीर लगातीं और मंगलगीत गाती नज़र आईं।
कई स्थानों पर सामूहिक होली-मिलन समारोह का आयोजन हुआ, जहां सामाजिक संगठनों और युवा क्लबों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। लोगों ने गिले-शिकवे भुलाकर गले मिलते हुए प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया। बुजुर्गों ने होलिका-दहन की परंपराओं और बीते वर्षों की होली की स्मृतियों को साझा कर नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया।
त्योहार की रौनक बाजारों में भी देखने को मिली। मिठाई की दुकानों पर गुजिया, मालपुआ, दही-बड़ा और ठंडाई की मांग बढ़ी रही। घरों में पकवानों की सुगंध ने उत्सव की मिठास को और गहरा कर दिया।
सोशल मीडिया के इस दौर में युवाओं ने रंगों से सराबोर तस्वीरें और वीडियो साझा कर होली की खुशियों को डिजिटल दुनिया तक पहुंचाया। हर चेहरे पर मुस्कान और हर दिल में अपनत्व की भावना साफ झलक रही थी।
निश्चय ही इस बार की होली ने अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, आपसी सौहार्द और लोकजीवन की जीवंतता को फिर से उजागर कर दिया। रंग, रस और राग से सजी यह होली लंबे समय तक स्मृतियों में बसी रहेगी।



