दिल्ली के शराब घोटाले से भी बड़ा है झारखंड का शराब घोटाला,मुख्यमंत्री की भूमिका संदेह के घेरे में है: बाबूलाल मरांडी
रांची: झारखंड में शराब घोटाला मे भाजपा हेमंत सोरेन सरकार को घेरने से चूक नहीं रही है। भाजपा को एक बहुत बड़ा मुद्दा सरकार के खिलाफ हाथ लग गई है। पूर्व सीएम सह प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी लगातार इस मामले पर मुखरता से बोल रहे हैं। साथ ही कहा है कि एक सौ करोड़ का यहां पर सीएम हेमंत सोरेन की मिलीभगत से शराब घोटाला हुआ है। एक तरह से झारखंड में सियासी हलचल तेज हो गई है। मरांडी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि यह घोटाला दिल्ली के शराब घोटाले से भी बड़ा है और इसमें मुख्यमंत्री की भूमिका संदेह के घेरे में है।
मरांडी ने अपने पोस्ट में लिखा, “मैं पहले भी कई बार कह चुका हूं कि झारखंड का शराब घोटाला दिल्ली शराब घोटाले से भी कहीं बड़ा है। अब ACB ने भी इस बात की पुष्टि की है कि झारखंड में 100 करोड़ रुपये का शराब घोटाला हुआ है।” उन्होंने आगे कहा कि इतना बड़ा घोटाला सिर्फ विभागीय अधिकारियों और प्लेसमेंट एजेंसी तक सीमित नहीं हो सकता।
इस घोटाले में छत्तीसगढ़ की कंपनियों को शराब कारोबार का जिम्मा सौंपे जाने का जिक्र करते हुए मरांडी ने सवाल उठाया कि इन कंपनियों से हेमंत सोरेन को किन माध्यमों से आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। उन्होंने मांग की कि एंटी-करप्शन ब्यूरो इस मामले में मुख्यमंत्री को समन कर उनका पक्ष जाने और बिना किसी राजनीतिक दबाव के उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच करे।
इस मामले में आईएएस विनय चौबे,गजेन्द्र सिंह सहित कई लोगों को एसीबी गिरफ्तार कर पूछताछ कर कार्रवाई कर रही है।
यह घोटाला छत्तीसगढ़ से जुड़े एक बड़े रैकेट का हिस्सा माना जा रहा है। सितंबर 2024 में छत्तीसगढ़ की ACB ने एक FIR दर्ज की थी, जिसमें विनय चौबे का नाम शामिल था। चौबे उस समय हेमंत सोरेन के प्रधान सचिव थे, जब 2022 में झारखंड में नई उत्पाद नीति लागू की गई थी। जांच में खुलासा हुआ कि इस नीति के तहत निविदा मानदंडों में बदलाव कर छत्तीसगढ़ की कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया। इन कंपनियों पर नकली होलोग्राम के साथ अवैध शराब की आपूर्ति और विदेशी शराब के वितरण में धांधली का आरोप है।
श्री मरांडी ने शराब घोटाले की सीबीआई से जांच की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने पीएम,गृह मंत्री को पत्र लिखा है।



